छत्तीसगढ़

रायपुर में नाबालिग से 3 साल तक दुष्कर्म का आरोप, नवजात को डेढ़ लाख में बेचने का खुलासा; पिता-बुआ समेत 9 गिरफ्तार..

रायपुर। राजधानी रायपुर में नाबालिग से दुष्कर्म और नवजात को बेचने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 16 वर्षीय किशोरी के साथ उसके पिता ने करीब तीन साल तक दुष्कर्म किया। इस दौरान वह दो बार गर्भवती हुई। आरोप है कि पहली बार उसका गर्भपात कराया गया, जबकि दूसरी बार गर्भवती होने पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे बालिग और शादीशुदा बताकर डिलीवरी कराई गई और नवजात को कथित तौर पर करीब डेढ़ लाख रुपये में दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया।

मामले में पुलिस ने आरोपी पिता और बुआ समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में नाबालिग की पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, डिलीवरी कराने और नवजात को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने की कड़ी सामने आई है।

तीन साल तक शोषण का आरोप

पुलिस को दी शिकायत में किशोरी ने आरोप लगाया कि करीब तीन साल पहले उसके पिता ने उसे एक कमरे में ले जाकर शराब पिलाई और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद किसी को बताने पर धमकी दी गई। पीड़िता के अनुसार, यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।

आरोप है कि पहली बार गर्भवती होने पर पिता और बुआ ने मिलकर उसका गर्भपात करा दिया। इसके बाद दोबारा गर्भवती होने पर गर्भपात का समय निकल चुका था, जिसके बाद उसकी डिलीवरी कराई गई।

बहनों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी का आरोप

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि विरोध करने पर आरोपी पिता उसे उसकी दो छोटी बहनों को लेकर भी धमकाता था। इसी डर के कारण वह लंबे समय तक किसी को अपनी आपबीती नहीं बता सकी।

पुलिस ने पीड़िता की शिकायत और उसके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर मामले से जुड़े लोगों की पहचान शुरू की।

फर्जी आधार से नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप

पुलिस जांच के अनुसार, नाबालिग की असली पहचान और उम्र छिपाने के लिए उसके आधार कार्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। दस्तावेज में जन्मतिथि बदलकर उसे बालिग और शादीशुदा दिखाया गया।

इसके बाद कथित तौर पर इसी फर्जी पहचान के आधार पर उसे रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी डिलीवरी कराई गई।

IVF सेंटर से जुड़े कनेक्शन की भी जांच

जांच में पुलिस को डिलीवरी से लेकर नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपे जाने तक कई लोगों की भूमिका की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, इस कड़ी में अस्पताल से जुड़े लोगों और रायपुर के एक IVF सेंटर में काम करने वाली महिला का नाम भी सामने आया है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि IVF सेंटर से जुड़े लोगों की इस पूरे मामले में क्या भूमिका थी और नाबालिग की पहचान छिपाने में किस-किस व्यक्ति ने मदद की।

डेढ़ लाख रुपये में नवजात को सौंपने का आरोप

पुलिस के अनुसार, डिलीवरी के बाद नवजात की कुछ दिनों तक देखभाल की गई। इसके बाद बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंपने की कथित तौर पर योजना बनाई गई। पुलिस जांच में करीब डेढ़ लाख रुपये में सौदा तय होने और रकम UPI के जरिए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

डिलीवरी के कुछ समय बाद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और लिखापढ़ी के जरिए नवजात को दूसरे व्यक्ति के हवाले कर दिया गया।

पिता-बुआ समेत 9 आरोपी गिरफ्तार

नाबालिग की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की। पीड़िता द्वारा बताए गए स्थानों, लोगों और घटनाक्रम के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई। अब तक पिता और बुआ समेत 9 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

रायपुर पश्चिम DCP के मुताबिक, मामले की जांच जारी है। पुलिस फर्जी आधार तैयार करने वाले व्यक्ति और IVF सेंटर से जुड़े कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहले कितने लोगों की पहचान बदली गई है।

पुलिस के अनुसार, मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।

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