वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत अमेरिकी वेनेजुएला के लगभग 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण करेगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इस डील की जानकारी दी है।
ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतिम राष्ट्रीपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच बातचीत के बाद हुआ था. ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील करार दिया है।
ट्रंप ने लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है – जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!
बता दें, यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था. ऐसा इसलिए किया गया था ताकि उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के संघीय आरोप लगाए जा सकें।
अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों के कारण राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बढ़ते जा रहा है. लगभग छह महीने से ईरान में युद्ध हो रहा है. और फिलहाल इसके खत्म होने के कोई संकेत भी नहीं हैं. ऐसे में, अमेरिका ने अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडाल का इस्तेमाल किया है जिससे अगस्त की शुरुआत तक इसमें 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।
वेनेज़ुएला के तेल पर अमेरिका की इतनी नजर क्यों?
वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वहां जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद है. यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17 फीसदी बताया जाता है. सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि इतना विशाल भंडार होने के बावजूद वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन वैश्विक उत्पादन का करीब 1 फीसदी ही है. इसकी बड़ी वजह देश का खराब और जर्जर तेल इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाता है. यानी तेल जमीन के नीचे मौजूद है, उसकी लोकेशन भी बड़े पैमाने पर पता है, लेकिन उसे निकालने और रिफाइन करने की क्षमता लंबे समय से कमजोर रही है. अमेरिका इसी क्षमता को दोबारा खड़ा करने में कारोबारी अवसर देख रहा है।
मादुरो के बाद बदला तेल का समीकरण
वेनेज़ुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद अमेरिका और देश की नई सरकार के बीच तेल को लेकर बातचीत तेज हुई. ट्रंप पहले ही अमेरिकी तेल कंपनियों से वेनेज़ुएला लौटकर वहां काम शुरू करने की अपील कर चुके थे. डेल्सी रोड्रिगेज भी इस कहानी में अहम किरदार हैं. वह पहले मादुरो सरकार में पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन मंत्री रह चुकी हैं और अब अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर अमेरिका के साथ इस नई व्यवस्था का हिस्सा हैं. ट्रंप का दावा है कि वेनेज़ुएला ने दशकों पहले ह्यूगो चावेज़ के दौर में अमेरिकी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करके अमेरिकी तेल हितों को नुकसान पहुंचाया था. अब नई व्यवस्था को वह अमेरिका के लिए आर्थिक वापसी के तौर पर पेश कर रहे हैं।
जनवरी में मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में वापस भेजने और वहां के तेल भंडारण के इस्तेमाल की बात कही थी. ट्रंप का कहना था कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था, जब वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेश संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था. इनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थी।
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है, जहां जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, यह दुनिया की कुल आर्पूति का लगभग 17% है. विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया के अन्य हिस्सों के बिल्कुल विपरीत जहां भूवैज्ञानिकों को बिना इस्तेमाल किए गए तेल की खोज करनी पड़ती है. वहीं वेनेजुएला की जमीन के नीचे मौजूद भंडार का बहुत हद तक पता लगाया जा चुका है और उनकी जानकारी है. लेकिन खराब बुनियादी ढांचे के कारण यह देश दुनिया के तेल का सिर्फ 1% ही उत्पादन करता है।
'इससे देश के खजाने में भारी राजस्व आएगा'
उन्होंने कहा कि यह समझौता अमेरिका की एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत फायदेमंद है और दावा किया कि इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने से भी ज़्यादा हो जाएंगे और गैस की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी. वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश के खजाने में भारी राजस्व आएगा।
रोड्रिगेज ने कहा कि देश अपने विशाल तेल भंडार का इस्तेमाल करके एक बड़ा एनर्जी प्रोड्यूसर बनना चाहता है. साथ ही नौकरियां पैदा करना, वर्करों की इनकम बढ़ाना और जीवन स्तर में सुधार करना चाहता है. उन्होंने कहा, "इस तरह वेनेजुएला अपने लोगों के लिए रिकवरी, ग्रोथ, प्रोडक्शन, सुरक्षा और खुशहाली के एक नए दौर की शुरुआत कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारी ने क्या बताया
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि इस डील से अमेरिका को एक नए प्राइवेट जॉइंट वेंचर से पैदा होने वाले तेल का 55% हिस्सा मिलेगा. उम्मीद है कि यह वेंचर रिजर्व के मामले में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट तेल कंपनी बन जाएगी. अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के समर्थन से रोड्रिगेज ने उस प्राइवेट कंपनी को तेल क्षेत्रों को चलाने के लिए 100 साल का अधिकार दिया. इस वेंचर को अमेरिकी सरकार और वेनेजुएला की एक प्राइवेट कंपनी मिलकर चलाएगी।
CNN के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने इस नई तेल कंपनी की आधी से ज्यादा वैल्यू हासिल कर ली है, जिसे इक्विटी ओनरशिप और गारंटीड 'एट-कॉस्ट ऑफ-टेक' (लागत मूल्य पर खरीद की गारंटी) के बीच बांटा गया है." अधिकारी के मुताबिक इससे जो तेल मिलेगा, उससे अमेरिकी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को फिर से भरने और अमेरिकी सेना की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।



