जगदलपुर/रायपुर। बस्तर की प्रगतिशील महिला किसान प्रभाती भारत ने छत्तीसगढ़ की कृषि को नई दिशा देते हुए इतिहास रच दिया है। वे प्रदेश की पहली महिला किसान बन गई हैं, जिन्होंने व्यावसायिक स्तर पर ब्लैक राइस (काला चावल) और रेड राइस (लाल चावल) की खेती शुरू की है। उनकी यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बस्तर की पारंपरिक कृषि विरासत को भी नई पहचान दिला रही है।
प्रभाती भारत वर्तमान में चार एकड़ भूमि में खेती कर रही हैं। इनमें दो एकड़ में ब्लैक राइस और दो एकड़ में रेड राइस की फसल लगाई गई है। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से विशेष बीज मंगवाए हैं। मौसम अनुकूल रहने पर इस सीजन में 60 से 70 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है।
ब्लैक राइस और रेड राइस को स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। ब्लैक राइस में एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, फाइबर और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि रेड राइस मधुमेह रोगियों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। यही कारण है कि इन दोनों किस्मों की देश और विदेश के बाजारों में लगातार मांग बढ़ रही है।
प्रभाती भारत का योगदान केवल नई फसल उगाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अब तक 450 से अधिक देसी धान किस्मों का संरक्षण किया है। इनमें से 62 किस्मों के पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है, जबकि अन्य किस्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी जारी है। उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए देशी बीजों की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखना है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह पहल बस्तर की कृषि को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्लैक और रेड राइस की संगठित खेती और ब्रांडिंग की जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
प्रभाती भारत की यह उपलब्धि प्रदेश की महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है और यह साबित करती है कि परंपरागत खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कृषि में नई क्रांति लाई जा सकती है।



