छत्तीसगढ़

पद्म विभूषण तीजन बाई छत्तीसगढ़ कला को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान पंडवानी गायिका,लंबी बीमारी के बाद निधन..

रायपुर 5 जुलाई 2026/विभूषण तीजन बाई: छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान पंडवानी गायिका का लंबी बीमारी के बाद 5 जुलाई 2026 को रायपुर में उनका निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय लोककला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका जीवन संघर्ष, कला-साधना और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
तीजन बाई छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली देश की महान लोकगायिका थीं। उनका जन्म 8 अगस्त 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और गाने का शौक था, जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने नाना से मिली।
सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस दौर में पंडवानी गायन पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने परंपराओं को चुनौती देते हुए खड़े होकर दमदार शैली में पंडवानी प्रस्तुत की और अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी प्रतिभा को प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने पहचाना, जिसके बाद उन्हें देश-विदेश में प्रस्तुति देने का अवसर मिला। उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, जर्मनी, मॉरीशस सहित अनेक देशों में छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम लहराया।
अपनी कला के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), पद्म भूषण (2003), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995) और पद्म विभूषण (2019) सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती थीं।

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