चंडीगढ़
हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस भर्ती में अनाथ अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले पांच अंकों के वेटेज को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मात्र पिता की मृत्यु हो जाने से कोई अभ्यर्थी अनाथ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन के उद्देश्य और राज्य सरकार की व्याख्या के अनुसार अनाथ वही होगा, जिसके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका हो।
साथ ही पिता की मृत्यु या तो 42 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले हुई हो अथवा अभ्यर्थी के 15 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हुई हो। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की 51 अपीलों को स्वीकार करते हुए 16 मई 2023 के सिंगल बेंच के फैसले को रद कर दिया।
मामला वर्ष 2018 में निकाले गए हरियाणा पुलिस भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें 5000 पुरुष कॉन्स्टेबल , 1147 महिला कॉन्स्टेबल , 500 आइआरबी पुरुष कॉन्स्टेबल , 400 पुरुष सब-इंस्पेक्टर तथा 63 महिला सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न श्रेणियों के लिए वेटेज का प्रविधान था।
इनमें अनाथ और विधवा श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को पांच अतिरिक्त अंक देने का भी प्रविधान शामिल है। विवाद तब शुरू हुआ, जब कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि विज्ञापन में केवल पिता की मृत्यु की शर्त का उल्लेख है, इसलिए यदि मां जीवित है तब भी उन्हें अनाथ मानकर पांच अंक दिए जाने चाहिएं। सिंगल बेंच ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आयोग को मेरिट सूची दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया था।
इस आदेश से पहले से चयनित कई अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए चयनित अभ्यर्थियों और एचएसएससी दोनों ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी नियम या शर्त में यदि व्याख्या का प्रश्न उठता है तो सबसे पहले उस प्राधिकरण की व्याख्या को महत्व दिया जाएगा, जिसने वह नियम बनाया है। यदि अदालत नियम निर्माता की मंशा से अलग अर्थ निकालती है तो वह न्यायिक विधिनिर्माण होगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।



