छत्तीसगढ़

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की बस्तर दशहरा की सराहना, मांझियों को अब ₹5,000 और चालकी को ₹3,500 मासिक मानदेय..

रायपुर/जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, अनूठी धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने मां दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी है। रथ निर्माण से लेकर उसे खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी निभाता है। यह परंपरा आपसी सहयोग और सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुरिया दरबार को बताया लोकतांत्रिक परंपराओं की मिसाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित मुरिया दरबार की सराहना करते हुए कहा कि यह जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं और सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हैं। सामूहिक संवाद से समाधान निकालने की यह व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर और संसाधन मिलने पर जनजातीय युवा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। राष्ट्रपति ने बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यहां के खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।

माओवाद से मुक्त बस्तर में विकास की नई उम्मीद

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर अब प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस बदलाव को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।

रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा शुरू की गई है और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम जारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है, जबकि गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य भी किया जा रहा है।

मांझियों और चालकी का बढ़ा मासिक मानदेय

बस्तर दशहरा के अवसर पर परंपरागत प्रतिनिधियों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है।

सरकार का यह कदम बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का संदेश

राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और अधिक से अधिक पौधरोपण पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी प्राकृतिक संपदा का लाभ मिल सके।

उन्होंने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और जनजातीय समाज को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने मां दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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