छत्तीसगढ़

बढ़ी बिजली दर से जनता त्रस्त, स्मार्ट मीटर मस्त..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली की बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट मीटर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर आम उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विपक्ष ने इसे जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान किया है।

हाल ही में बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी के बाद घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा है। विपक्ष का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे, व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे और कृषि पंपों की बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। इसके अलावा ईंधन अधिभार (MPPS) का भी असर उपभोक्ताओं के बिलों पर पड़ रहा है।

कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक बिजली दर्ज कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े मकानों में भी अपेक्षा से अधिक रीडिंग दर्ज हो रही है, जिससे भारी-भरकम बिजली बिल आ रहे हैं।

उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में बिना उनकी सहमति के अनुबंधित लोड (Sanctioned Load) बढ़ाकर अतिरिक्त शुल्क और पेनाल्टी जोड़ी जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर बिजली विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रदेश कांग्रेस ने बढ़ी हुई बिजली दरों और स्मार्ट मीटर के विरोध में जुलाई से राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से स्मार्ट मीटर हटाने के लिए आवेदन भरवाएंगे और उन्हें मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।

विपक्ष ने यह भी मांग की है कि जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार स्मार्ट मीटर योजना पर पुनर्विचार करे और बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस ले।

इधर, मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत बकाया बिजली बिलों पर सरचार्ज माफी का लाभ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक का सरचार्ज माफ किया जा चुका है, जबकि 72 करोड़ रुपये से अधिक की मूल बकाया राशि जमा हुई है।

बिजली कंपनी अब समाधान योजना की अवधि बढ़ाने की तैयारी में है ताकि अधिक से अधिक बकायादार इसका लाभ उठा सकें।

बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं ने सरकार से पारदर्शी जांच, मीटरों की तकनीकी समीक्षा और बिजली दरों पर राहत देने की मांग की है। वहीं इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति भी लगातार गरमाती जा रही है।

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