रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा प्रदेश के छह जिलों के 312 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया है। यह प्रक्रिया 25 से 30 सितंबर 2026 तक कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद में आयोजित की गई।
वन विभाग के अंतर्गत बोर्ड और काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) से वैद्यों के प्रमाणीकरण के लिए अधिकृत संस्था सेंटर फॉर ट्रेड टेस्टिंग एंड सर्टिफिकेशन ऑफ स्किल्ड वर्कर्स (CTTC) ने यह परीक्षण कराया। इसमें सामान्य बीमारी, पीलिया, आर्थराइटिस, बोन सेटिंग और जहरीले बाइट के उपचार जैसी पांच विधाओं को शामिल किया गया।
दो चरणों में हुआ परीक्षण
वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की गई। पहले चरण में आवेदन की जांच, उपचार विधियों का मौखिक परीक्षण, ताजी औषधीय पौधों और कच्चे औषधीय उत्पादों की पहचान, औषधि निर्माण की विधि तथा मरीजों को दी जाने वाली औषधि की मात्रा का परीक्षण किया गया।
दूसरे चरण में वैद्यों के घर जाकर उनके उपचार की सजीव प्रक्रिया का परीक्षण किया गया और मरीजों से उपचार को लेकर फीडबैक भी लिया गया।
धमतरी में सबसे ज्यादा वैद्य प्रमाणीकृत
25 से 30 सितंबर के दौरान हुए परीक्षण में धमतरी के 135, कोंडागांव के 60, कांकेर के 60, नारायणपुर के 23 तथा गरियाबंद और महासमुंद के कुल 34 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया।
छत्तीसगढ़ शासन और बोर्ड ने मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।



