सोनीपत
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन के पहले दिन यात्रियों को सफर का बिल्कुल अलग अनुभव मिला। ट्रेन रविवार सुबह जींद से रवाना होकर 8:52 बजे गोहाना रेलवे स्टेशन पहुंची। यह अपने निर्धारित समय से चार मिनट देरी से थी।
कुछ मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन सोनीपत के लिए रवाना हुई और सुबह 9:41 बजे अंतिम स्टेशन सोनीपत पहुंच गई, जो केवल एक मिनट लेट रही। ट्रेन में पहले दिन जींद से सोनीपत तक लगभग 84 यात्रियों ने बच्चों के साथ सफर किया, जबकि इसकी कुल क्षमता करीब 2600 यात्रियों की है।
आरामदायक रहा सफर
यात्रियों की संख्या कम रही लेकिन सफर करने वाले लोगों ने आधुनिक तकनीक और आरामदायक यात्रा की जमकर सराहना की। यात्रियों ने दैनिक जागरण को कम झटके, कम शोर, आटो लाक वाले दरवाजे, आरामदायक सीटें व गर्मी में हवा की व्यवस्था को जमकर सराहा।
ट्रेन जैसे ही गोहाना स्टेशन से रवाना हुई यात्रियों ने सबसे पहले उसके शांत संचालन को महसूस किया। डीजल इंजन जैसी तेज आवाज और कंपन लगभग बहुत कम थे। ट्रेन धीरे-धीरे और सहज तरीके से रफ्तार पकड़ती रही।
चलने और रुकने के दौरान पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में झटके काफी कम महसूस हुए। इसका मुख्य कारण आधुनिक डिब्बों में सेंटर बफर कपलर का हाईटेक सिस्टम बताया गया है। डीजल ट्रेनों की तरफ इस ट्रेन में धुआं नजर नहीं आया बल्कि इंजन से जलवाष्प निकलता नजर आया।
सफर के दौरान बच्चों, किशारों, युवाओं और बुजुर्गाें ने मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाए। युवाओं, बच्चों और किशाेरों ने सफर के दौरान अलग-अलग अंदाज में सेल्फी भी लीं। ट्रेन में सफाई, मोबाइल चार्जर प्वाइंट और सामान रखने की व्यवस्था को सभी ने सराहा।
हाइड्रोजन ट्रेन में वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट
सामान्य ट्रेनों के शौचालयों में देसी सीट लगी होती है, लेकिन कम दूरी की लोकल हाइड्रोजन ट्रेन में वेस्टर्न स्टाइल की सीटें लगाई गईं हैं जो मुख्य रूप से एसी कोच और अन्य ट्रेनों में होती हैं।
यह ट्रेन सोनीपत से सुबह 10:40 बजे निर्धारित समय से सात मिनट की देरी से रवाना हुई और गोहाना स्टेशन पर नौ मिनट की देरी से 11:38 बजे पहुंची। सोनीपत से गोहाना के लिए 78 यात्री और कई बच्चे सवार हुए।
गोहाना स्टेशन पर लगभग 30 यात्री ट्रेन से उतरे और दूसरे लोगों से अनुभव साझा किया। कई लोग केवल इस आधुनिक ट्रेन में यात्रा करने और इसकी तकनीक को करीब से देखने के लिए पहुंचे। रविवार को छुट्टी के चलते ट्रेन में कम लोग सफर करने के लिए पहुंचे लेकिन सोमवार से संख्या बढ़ सकती है।
क्या बोले लोग
मैंने पहले कई बार जींद से सोनीपत और दूसरी जगह कई ट्रेनों में यात्रा की है, लेकिन यह अनुभव अलग रहा। जब ट्रेन चली तो कोई तेज आवाज या झटका महसूस नहीं हुआ। खिड़की से बाहर देखा तो पता चला कि ट्रेन अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ चुकी है।
सतपाल ढांढा, जींद
मुझे कोई काम नहीं था, लेकिन देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सफर करने के लिए घर से निकला। जींद से सोनीपत तक सफर किया और लोकल ट्रेन से इसमें अलग अनुभव रहा। सीटें आरामदायक हैं, जिससे सफर आसान बना और शौचालय एसी कोच जैसे हैं।
कृष्ण यादव, सफीदों
उम्र बढ़ने के साथ यात्राओं में झटकों और कंपन से परेशानी होती है, लेकिन इस ट्रेन में ऐसा बिल्कुल महसूस नहीं हुआ। भविष्य में इस तरह की ट्रेनें अन्य रूटों पर भी चलेंगी तो बुजुर्ग यात्रियों के लिए यात्रा और अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
वीरेंद्र गोयल, जींद
मेरे साथ मेरी पोती, पोता व पत्नी सफर कर रहे हैं। दोनों बच्चे पूरे रास्ते ट्रेन को लेकर उत्साहित रहे। बच्चों ने सीटों पर बैठकर बाहर के दृश्य देखे और लगातार फोटो खींचे व वीडियो बनाते रहे। सामान्य ट्रेनों की तुलना में इस ट्रेन में सफर अधिक आरामदायक लगा और बच्चों को भी यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
महासिंह और संतोष, गोहाना
मैंने ट्रेनों में 35 साल तक सफर किया है। पाेतों और पोतियों को नई हाइड्रोजन ट्रेन में सफर का अनुभव कराने के लिए उनको साथ लेकर आया हूं। वंशिका, वैदिक, सीनू, सानवी व स्नाया ने खूब मस्ती करते हुए जींद से सोनीपत और सोनीपत से जींद तक सफर किया।
राजपाल, जींद
हम दोनों सोनीपत में पढ़ती हैं। रविवार को छुट्टी को जींद घर जाने की इच्छा हुई। स्टेशन पर पहुंची तो पता चला कि हाइड्रोजन ट्रेन जींद जाने के लिए तैयार है। टिकट लिया और इसमें सवार हुईं। शांत व आरामदायक सफर का अहसास हुआ और इस ट्रेन में सफर करने पर अच्छा भी लगा।
प्रियंका व मुन्ना, जींद
इस ट्रेन में सफर करने के लिए परिवार के साथ आई हूं। अखबारों व दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में काफी रील देखी थी, लेकिन वास्तविक अनुभव उससे भी बेहतर निकला। ट्रेन का अंदरूनी माहौल शांत रहा और पूरे सफर के दौरान कहीं भी तेज कंपन महसूस नहीं हुआ।
खुशबू, जींद
अभी यह सुधार की जरूरत
– एमरजेंसी टाक सिस्टम लगा है, लेकिन ठीक से काम नहीं कर रहा है
– यात्रियों को इसके उपयोग के प्रशिक्षण देने की जरूरत
– दरवाजों के पास सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं
– शुभारंभ के दिन ट्रेन में काफी पुलिसकर्मी सवार थे जो रविवार को नजर नहीं आए
– एक जगह ऐसा है जहां एक से दूसरी बोगी में जाने पर बीच में पैड सिस्टम ठीक नहीं है



