रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने सौजन्य भेंट की। आत्मीय वातावरण में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न समसामयिक विषयों, सुशासन, जनकल्याण, सामाजिक विकास तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। यह मुलाकात शिष्टाचार के साथ-साथ राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और विकास संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण अवसर बनी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का मुख्यमंत्री निवास पहुंचने पर पारंपरिक आत्मीयता के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय परंपराओं का प्रतीक बस्तर आर्ट का आकर्षक स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है और बस्तर की हस्तशिल्प कला यहां की समृद्ध परंपरा एवं कारीगरों की अद्भुत प्रतिभा का प्रतीक है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार द्वारा सुशासन, ग्रामीण विकास, जनकल्याण, कृषि, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी विकास तथा डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है और पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने छत्तीसगढ़ में हो रहे विकास कार्यों और जनहितैषी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच आपसी सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान देश के समग्र विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दोनों नेताओं के बीच सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी क्षेत्रों के विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। साथ ही भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास में राज्यों की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की आत्मीय मुलाकातें राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगी तथा विकास और सुशासन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगी।
यह सौजन्य भेंट सौहार्द, सहयोग और विकास की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही, जिसमें दोनों नेताओं ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश और समाज के समग्र विकास के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।



