रायपुर । केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया बस्तर दौरे और नक्सलवाद पर सरकार की बड़ी सफलता के बाद बस्तर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनता दिखाई दे रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक Sandeep Akhil ने अपने विशेष सम्पादकीय में कहा है कि “भयमुक्त बस्तर का विकास ही भारत के पुनर्जागरण की नींव बनेगा।”
उन्होंने लिखा कि दशकों तक नक्सली हिंसा से जूझने वाले बस्तर में अब बंदूक की जगह विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता ने लेनी शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा “देश अब नक्सलमुक्त हो चुका है” जैसे बयान को उन्होंने हजारों शहीद जवानों और संघर्षरत आदिवासियों के सम्मान से जोड़ा
सम्पादकीय में कहा गया कि बस्तर में नक्सलवाद केवल हिंसा नहीं बल्कि टूटे परिवारों, छिनते बचपन और विकास के ठहर जाने की त्रासदी भी रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि कई युवाओं को बचपन में ही हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया गया था
लेख में सुरक्षा बलों की भूमिका को निर्णायक बताते हुए डीआरजी, कोबरा बटालियन और अन्य जवानों के साहस और बलिदान को ऐतिहासिक जीत का आधार बताया गया। साथ ही बस्तर में लोगों के बदलते विश्वास को शांति की सबसे बड़ी पहचान माना गया
सम्पादकीय के अनुसार अब बस्तर में सड़क, स्कूल और अस्पताल विकास के नए स्तंभ बन रहे हैं। नेतानार में सुरक्षा कैंप को जनसुविधा केंद्र में बदलना प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते भरोसे का बड़ा प्रतीक बताया गया है।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि स्थानीय महिलाओं द्वारा इमली प्रसंस्करण जैसे कार्यों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की जा रही है। इसे आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को जमीन पर उतारने वाला कदम बताया गया।
हालांकि सम्पादकीय में यह भी कहा गया कि चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और असली परीक्षा इस बदलाव को स्थायी बनाने की है। युवाओं को सही दिशा, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और निरंतर विकास ही बस्तर के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है।
लेख के अंत में कहा गया कि भयमुक्त बस्तर केवल एक क्षेत्र का बदलाव नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। यह संदेश है कि जब सुरक्षा, विकास और संवेदनशीलता साथ चलते हैं, तब असंभव भी संभव हो जाता है।



