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Trump Loyalty Test पर अमेरिकी कोर्ट की रोक, सरकारी नौकरी के आवेदकों से नीतियों पर सवाल पूछने पर पाबंदी

वाशिंगटन

अमेरिका में सरकारी नौकरी के लिए राजनीतिक वफादारी साबित नहीं करनी होगी. बोस्टन की अदालत ने डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के उस नियम पर रोक लगा दी है, जिसमें आवेदकों से उनकी सोच पूछी जा रही थी. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी उम्मीदवार से उसकी राजनीतिक राय जानने का सरकार को कोई हक नहीं है। 

यह मामला उन सरकारी नौकरियों से जुड़ा है, जिन्हें राजनीतिक पद नहीं माना जाता. इसके बावजूद आवेदकों से पूछा जा रहा था कि वे ट्रंप की नीतियों और उनके कार्यकारी आदेशों को आगे बढ़ाने में किस तरह मदद करेंगे. कर्मचारी संगठनों ने इसे राजनीतिक सोच जानने वाला सवाल बताया था. उनका कहना था कि सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी उम्मीदवार से राजनीतिक निष्ठा साबित करने को नहीं कहा जा सकता। 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बोस्टन की संघीय अदालत के जज जॉर्ज ओ'टूल ने तीन कर्मचारी यूनियनों का पक्ष माना. इन संगठनों ने पिछले साल ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासन ऐसे सवाल को सरकारी नौकरी के आवेदन में जारी नहीं रख सकेगा। 

ट्रंप के आदेश के बाद शुरू हुआ था सवाल
मामला दरअसल ट्रंप प्रशासन के एक कार्यकारी आदेश से जुड़ा है. इसी आदेश को लागू करने के लिए सरकारी नौकरी के आवेदन में 'लॉयल्टी' से जुड़ा सवाल शामिल किया गया था. आवेदकों से एक तरह का जवाब मांगा जा रहा था कि वे ट्रंप की नीतियों को आगे बढ़ाने में किस तरह मदद करेंगे. सरकार के स्तर पर यह प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से जुड़ी बताई गई थी. मगर कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया. उनका तर्क था कि जिन नौकरियों का काम राजनीतिक दल या किसी नेता के प्रति वफादारी से तय नहीं होता, वहां उम्मीदवार की राजनीतिक सोच जानना सही नहीं है। 

जज बोले- राजनीतिक सोच पूछने की जरूरत नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज जॉर्ज ओ'टूल ने अपने फैसले में कहा कि सरकार के पास आवेदकों की राजनीतिक मान्यताओं के बारे में इस तरह की जानकारी मांगने का कोई वैध हित नहीं है. यानी सिर्फ सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति से यह जानना जरूरी नहीं है कि वह किसी राष्ट्रपति की राजनीतिक नीतियों के बारे में क्या सोचता है। 

इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की भर्ती प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है. कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, देशभर में 70 हजार से ज्यादा संघीय सरकारी नौकरियों के विज्ञापनों में यह सवाल शामिल किया गया था। 

तीन कर्मचारी संगठनों ने किया था मुकदमा
तीन सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने पिछले साल इस व्यवस्था को कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों को अपनी योग्यता के आधार पर चुना जाना चाहिए, न कि उनकी राजनीतिक सोच के आधार पर। 

अब अदालत के आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए सरकारी नौकरियों के आवेदकों से इस तरह की 'लॉयल्टी' जानकारी मांगना रोक दिया गया है. मामला सिर्फ एक सवाल का नहीं है. इसके जरिए यह बहस भी सामने आई है कि सरकारी नौकरी में उम्मीदवार की योग्यता देखी जाए या उसकी राजनीतिक सोच। 

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