रांची
समग्र शिक्षा अभियान के तहत छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित करना है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे पारिवारिक एवं सामाजिक कारणों से स्कूल से बाहर हैं।
उनकी मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा पूरी नहीं हो पा रही है। अब सरकार ने ऐसे बच्चों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (NIOS) से मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई दूरस्थ माध्यम से कराने का निर्णय किया है।
पारिवारिक एवं सामाजिक कारणों से स्कूल से बाहर रह रहे 14 से 16 वर्ष के बच्चों का नामांकन मैट्रिक में होगा। वहीं, 16 से 18 वर्ष के बच्चों का नामांकन इंटरमीडिएट में लिया जाएगा, बशर्ते वे मैट्रिक उत्तीर्ण हों। परीक्षा उत्तीर्ण होने पर उन्हें एनआइओएस का प्रमाणपत्र मिलेगा।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिए हैं। ऐसे बच्चे नामांकन के लिए आवेदन 29 अगस्त तक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में दे सकेंगे।
परिषद ने अभिभावकों एवं अन्य नागरिकों से भी ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें नामांकन के लिए प्रेरित करने तथा बच्चों की जानकारी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में संचालित विद्या समीक्षा केंद्र के टाल फ्री नंबर 0651-2710007 पर देने का अनुरोध किया है।
माध्यमिक स्तर पर 6.6 प्रतिशत बच्चे छोड़ देते हैं स्कूल
झारखंड में प्राथमिक स्तर पर बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर तो बहुत कम है, लेकिन उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर यह अधिक है। उच्च प्राथमिक स्तर पर यह दर 2.5 तथा माध्यमिक स्तर पर 6.6 प्रतिशत है। इतने बच्चे स्कूल छोड़ने के कारण क्रमश: मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते।
इसे ध्यान में रखते हुए ऐसे बच्चों की पहचान कर एनआइओएस से उनकी पढ़ाई कराने का निर्णय किया गया है। बताते चलें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2030 तक माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



