मध्य्प्रदेश

25 साल की उम्र में भी अमर हो गए गौरव दवे! अंगदान से 7 गंभीर मरीजों को मिला नया जीवन

इंदौर 
 मध्य प्रदेश में अंगदान के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ रही है. खासकर ब्रेनडेड होने के बाद अंगदान करने से कई लोगों की जान बचाई गई. इस मामले में इंदौर सबसे आगे है. इंदौर में सोमवार को फिर ब्रेनडेड घोषित एक युवा के अंगदान करने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इस युवक का लिवर आज ही एक बेहद जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट किया जाना है. इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर 68 वीं बार बनाया जा रहा है। 

ब्रेनडेड के बाद अंगदान का फैसला
इंदौर के खजूरी बाजार के रहने वाले युवा 25 वर्षीय गौरव दवे का बीते 13 जुलाई को ब्रेन हेमेरेज हुआ था. उन्हें एक निजी अस्पताल में एडमिट किया गया. डॉक्टर्स ने काफी कोशिश की लेकिन गौरव की हालत में सुधार नहीं हुआ. डॉक्टर्स ने गौरव का ब्रेनडेड घोषित कर दिया. इसके बाद बाद परिजनों ने गौरव के अंगदान करने का फैसला लिया. गौरव के पिता सतीश दवे और माता कविता दवे का कहना है "उनका बेटा भले ही इस दुनिया में न रहे लेकिन उसके अंग कई मरीजों को नया जीवन देंगे. इससे बढ़िया सार्थक जीवन और क्या हो सकता है। 

कास्टिंग डायरेक्टर थे गौरव
गौरव दवे पेशे से कास्टिंग डायरेक्टर थे। वह वर्ष 2021 से फिल्म और वेब सीरीज से जुड़े प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे थे। उन्होंने इंदौर में शूट हुई अभिनेता विक्की कौशल और सारा अली खान की फिल्म 'जरा हटके जरा बचके' में कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में अपनी शुरुआत की थी। इसके बाद भी वह कई प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे और कलाकारों के चुनने में अहम भूमिका निभाते रहे।

ब्रेम हैमरेज से मौत
परिजनों के अनुसार कुछ दिन पहले गौरव को अचानक तेज सिरदर्द की शिकायत हुई थी। पहले उन्हें इलाज के लिए मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक दिन उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया लेकिन अगले ही दिन फिर सिरदर्द बढ़ने पर राजश्री अपोलो अस्पताल ले जाया गया। यहां जांच के दौरान ब्रेन हैमरेज की पुष्टि हुई। 16 जुलाई को उनकी ब्रेन सर्जरी की गई।

मोयामोया नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित
इसी दौरान डॉक्टरों को पता चला कि गौरव मोयामोया नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे। बताया गया कि इस बीमारी का यह दुनिया का आठवां और भारत का तीसरा मामला है। तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 26 जुलाई की सुबह करीब सात बजे डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

परिवार ने अंगदान की दी सहमति
इस कठिन समय में परिवार ने बड़ा फैसला लेते हुए अंगदान की सहमति दी। मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के जीतू बागानी ने बताया कि गौरव की बहन वैदही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रितिक चावरे ने माता-पिता सतीश दवे और कविता दवे को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। इसके बाद पूरे परिवार ने एकमत होकर अंगदान का निर्णय लिया।

इंदौर में बना ग्रीन कॉरिडोर
सोमवार सुबह 7.30 बजे इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। गौरव का हृदय अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल की टीम रविवार देर रात सड़क मार्ग से इंदौर पहुंची थी और सोमवार सुबह 8.45 बजे विमान से हृदय लेकर रवाना हुई। वहीं, उनका लिवर अपोलो अस्पताल में भर्ती एक मरीज को लगाया जाएगा। दोनों किडनियां चोइथराम अस्पताल में दो अलग-अलग मरीजों को प्रत्यारोपित की जाएंगी। गौरव के परिवार में माता-पिता और एक बहन हैं, जिसकी शादी करीब आठ महीने पहले हुई थी।

लिवर का ट्रांसप्लांट आज ही होगा
परिजनों की पहल पर डॉक्टर्स ने सारी जरूरी लिखा-पढी कर अंग प्रत्यारोपण की तैयारी की. इसके लिए सोमवार दोपहर को इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है. मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने गौरव के परिजनों और स्वास्थ्य विभाग से समन्वय बनाकर सारी औपचारिकताएं पूरी कराईं। 

गौरव के अंगदान से गंभीर से पीड़ित एक मरीज के लिवर का ट्रांसप्लांट आज ही किया जाएगा. उसकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती दो मरीजों को ट्रांसप्लांट की जाएंगी. मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के अनसार "गौरव के हृदय, फेफड़े, हार्ट वाल्व, पेनक्रियाज और छोटी आंत भी गंभीर मरीजों को प्रत्यारोपित किए जाएंगे।

ग्रीन कॉरिडोर क्या होता है?
ग्रीन कॉरिडोर एक स्पेशल रूट होता है, जो दो अस्पतालों के बीच बनाया जाता है. एक अस्पताल जहां कोई मरीज अपना अंगदान कर रहा हो और दूसरा वह अस्पताल जहां कोई दूसरे मरीज को यह अंगदान किया जा रहा हो. इन दोनों अस्पतालों को कनेक्ट करने वाले रास्ते को ब्लॉक कर दिया जाता है।  

बहन, बहनोई और भाई ने की बातचीत; माता-पिता ने रजामंदी दी
ब्रेन डेथ की पुष्टि होने के बाद गौरव की बहन वैदेही राठी, बहनोई पल्केश राठी और भाई रितिक चावरे ने माता-पिता को संभाला। उनसे गौरव के अंग दान करने को लेकर बातचीत की। माता-पिता ने इसके लिए सहमति दे दी।

अंगदान की प्रक्रिया में मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने दवे परिवार का सहयोग किया। आर्य ने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेथ और अंगदान के बारे में समझाया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई।

लिवर-किडनी, आंखें इंदौर में प्रत्यारोपित; हार्ट अहमदाबाद भेजा
सोमवार सुबह गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया, जहां 28 वर्षीय युवक को लगाया जाएगा।

उनकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती 22 और 52 वर्ष की दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं जबकि आंखें शंकरा आई बैंक के माध्यम से दान की गईं।

बड़ा अभिनेता बनना चाहते थे, असली हीरो बन गए
गौरव के साथ फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली ड्रीम वर्ल्ड मूवीज एंड प्रोडक्शन की एचओडी महक राज ने कहा- करीब 4 साल पहले बी.कॉम करने के बाद गौरव इंडस्ट्री से जुड़ गए थे। इंदौर में रहकर ही काम करते थे। वे अपनी मेहनत, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के प्रिय थे।

उन्होंने कहा कि आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन जाते-जाते कई लोगों को नई जिंदगी देकर वे सच्चे मायनों में हीरो बन गए।

विश्व में अब तक 8 ही लोगों को हुई ये बीमारी
महक ने कहा- गौरव को बचपन से ही ब्रेन की बीमारी मोया-मोया थी, जो विश्व में अब तक सिर्फ 8 और भारत में तीन ही लोगों को हुई है। उन्हें 13 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां दो दिन बाद ब्रेन सर्जरी की गई, दो स्टेंट डाले गए थे।

इसके बाद गौरव को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन अगले दिन ही फिर उनकी हालत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया। इसके बाद वे होश में नहीं आए।

वहीं, मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के संदीपन आर्य ने कहा- दवे परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

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