छत्तीसगढ़

24 घंटे तक टापू में फंसे रहे 200 ग्रामीण, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मौसम विभाग ने उत्तर छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद समेत कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

मुंगेली में पसरहा पारा बना टापू

मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक में भारी बारिश के बाद पसरहा पारा टापू में बदल गया। करीब 200 ग्रामीण लगभग 24 घंटे तक पानी से घिरे रहे। हालात बिगड़ने के बाद SDRF की टीम ने नावों की मदद से करीब 10 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी ग्रामीणों को सुरक्षित राहत शिविर पहुंचाया।

खुड़िया बांध से तेजी से बह रहा पानी

मुंगेली के राजीव गांधी जलाशय यानी खुड़िया बांध में भी पानी का स्तर लगातार बढ़ा है। वेस्ट वेयर से करीब 6 फीट पानी बह रहा है, जिसके कारण मनियारी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया है।

कोडार डैम 100% भर गया

महासमुंद जिले में लगातार बारिश के कारण कोडार डैम पूरी क्षमता तक भर गया है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर FRL से ऊपर पहुंचने के बाद डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

NH-45 पर फंसे वाहन

बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा रोड-गौरेला मार्ग को जोड़ने वाले NH-45 पर बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ और गड्ढों की समस्या बढ़ गई। इसके चलते कई भारी वाहन फंस गए और सड़क पर लंबा जाम लग गया।

GPM में जर्जर मकान ढहा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भारी बारिश के बीच गौरेला शहर के वार्ड नंबर 8 में एक जर्जर मकान ढह गया। मकान की दीवारों में पहले से दरारें थीं, जिसके चलते समय रहते घर खाली करा लिया गया था। इससे बड़ा हादसा टल गया।

प्रदेश में अब तक 650.9 मिमी बारिश

छत्तीसगढ़ में अब तक 650.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 686.6 मिमी है। यानी प्रदेश में इस अवधि में करीब 5% कम बारिश हुई है। इसके बावजूद मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में बारिश सामान्य श्रेणी में है।

अगले दो दिन भी बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना है। मौसम में यह सक्रियता निम्न दबाव क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण और मानसून द्रोणिका के प्रभाव के कारण बनी हुई है।

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