रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योग स्थापना का मामला गरमा गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राम अल्दा और देवरी-घुलघुल में कथित जालसाजी कर उद्योगों के पक्ष में प्रस्ताव तैयार किए जाने का मुद्दा उठाते हुए दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और कंपनियों को आवंटित जमीन निरस्त करने की मांग की। मंत्री ओपी चौधरी के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के प्रस्तावों में जालसाजी हुई है और जांच रिपोर्ट आने के बावजूद सरपंच, सचिव एवं संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पंचायत के सभी रिकॉर्ड सचिव के पास रहते हैं, ऐसे में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर दोषियों को बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है और संबंधित उद्योगों को आवंटित जमीन कब निरस्त की जाएगी।
इस पर उद्योग एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए बताया कि बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड तथा अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड ने अब तक छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जल एवं वायु अधिनियम के तहत सहमति के लिए आवेदन नहीं किया है। इसलिए मंडल को कोई ग्रामसभा प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ और पर्यावरणीय स्वीकृति भी जारी नहीं की गई है।
मंत्री ने बताया कि ग्राम अल्दा की ग्रामसभा के प्रस्ताव में जालसाजी की शिकायत पर गठित त्रि-सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि कार्यवाही पंजी की अंतिम दो पंक्तियां किसने जोड़ीं, इसका पता नहीं चल सका। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की पुलिस जांच जारी है। यदि जांच में सरपंच, सचिव, कंपनी प्रतिनिधि या अन्य कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और वैध ग्रामसभा प्रस्ताव के बिना किसी भी परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलेगी।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस ने सरकार पर सदन को गुमराह करने और दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट करते हुए जोरदार नारेबाजी की। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में काफी देर तक राजनीतिक माहौल गरमाया रहा।



