रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) के कलेक्टर संतोष देवांगन को पद से हटा दिया। उन्हें मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है, जबकि उनकी जगह विजय के. दयाराम को नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि 6 मई 2026 को कलेक्टर बने संतोष देवांगन को महज दो महीने बाद ही क्यों हटा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जीपीएम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक निजी अस्पताल में कथित लापरवाही से दो महिलाओं की मौत के मामले में कार्रवाई हुई थी। इसी मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कलेक्टर से फोन पर चर्चा की थी।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कलेक्टर का जवाब मंत्री को नागवार गुजरा। इसके बाद मामले की शिकायत शासन स्तर तक पहुंची। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक के बाद अधिकारियों की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं। ऐसे में जिले के कामकाज और प्रदर्शन को लेकर भी समीक्षा की गई थी। कुछ अधिकारियों का मानना है कि कलेक्टर के प्रदर्शन को लेकर भी सरकार संतुष्ट नहीं थी।
आईएएस संतोष देवांगन राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर 2013 बैच के आईएएस बने थे। कलेक्टर बनने से पहले वे उच्च शिक्षा विभाग में आयुक्त रहे।
इससे पहले बिलासपुर में एसडीएम रहते हुए उनका तत्कालीन मंत्री रामविचार नेताम के साथ विवाद भी सुर्खियों में रहा था। उस घटना के बाद प्रशासनिक सेवा संघ ने भी विरोध दर्ज कराया था।
फिलहाल राज्य सरकार ने तबादले के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया है। मंत्री से कथित विवाद और प्रदर्शन से जुड़ी चर्चाएं फिलहाल सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



