रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले और भारतमाला परियोजना में कथित भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को पूर्व CGPSC सचिव एवं रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव (जेके ध्रुव) के भिलाई स्थित निवास समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी की। सुबह तड़के शुरू हुई कार्रवाई में ED अधिकारियों के साथ CRPF के जवान भी मौजूद रहे।
करीब छह वाहनों में सवार ED की टीम ने भिलाई सेक्टर-10 स्थित जेके ध्रुव के घर पहुंचकर दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की। फिलहाल एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन कार्रवाई को CGPSC भर्ती घोटाले और भारतमाला परियोजना में हुए कथित आर्थिक अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
जेके ध्रुव पहले से ही CGPSC भर्ती घोटाले में आरोपी हैं और वर्तमान में जेल में बंद हैं। इससे पहले उनके ठिकानों पर CBI भी कार्रवाई कर चुकी है। अब ED मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पहलुओं की जांच कर रही है।
भारतमाला घोटाला क्या है?
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में करीब 43 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। जांच में सामने आया कि जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई। आरोप है कि राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।
अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन को 159 खसरों में विभाजित कर रिकॉर्ड में करीब 80 नए नाम जोड़े गए। इससे लगभग 29.5 करोड़ रुपए का वास्तविक मुआवजा बढ़कर 70 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। इस मामले में 78 करोड़ रुपए का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है।
हरमीत खनूजा और चावला परिवार भी जांच के दायरे में
इस मामले में कारोबारी हरमीत सिंह खनूजा को मुख्य आरोपी माना जा रहा है। ED की जांच में उसके ससुर हरमीत सिंह चावला से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।
कई अधिकारियों पर गिरी गाज
मामले के सामने आने के बाद कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम आयुक्त निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। जांच रिपोर्ट में 43 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है।
क्या है भारतमाला परियोजना?
भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना है, जिसके तहत देशभर में लगभग 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य माल परिवहन को तेज, सुगम और किफायती बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर इसी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फिलहाल ED की छापेमारी जारी है और जांच एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस कार्रवाई से CGPSC भर्ती घोटाले और भारतमाला भूमि अधिग्रहण मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है।



