छत्तीसगढ़

पदोन्नति में TET-B.Ed. की अनिवार्यता के बीच फर्जीवाड़े का आरोप, डिग्री और विभागीय अनुमति पर उठे सवाल..

कोरबा। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया के बीच TET और B.Ed. की अनिवार्यता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कोरबा जिले में कुछ शिक्षकों की B.Ed. डिग्री, विभागीय अनुमति और वरिष्ठता सूची में दर्ज योग्यता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष एवं कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला महासचिव ओमप्रकाश बघेल ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

विभागीय अनुमति को लेकर उठे सवाल

शिकायत के मुताबिक, कुछ शिक्षकों ने सेवा में रहते हुए बिना विभागीय अनुमति नियमित B.Ed. की पढ़ाई कर उपाधि हासिल की। बाद में कार्योत्तर अनुमति के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन किए गए और प्रस्ताव शिक्षा संभाग बिलासपुर भेजे गए।

बताया गया कि संबंधित प्रकरणों में कार्योत्तर अनुमति के आदेश जारी होने के बाद महज 24 घंटे के भीतर उन्हें निरस्त कर दिया गया। इसी को लेकर विभागीय प्रक्रिया और दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इन शिक्षकों के प्रकरण जांच के घेरे में

शिकायत में मुकुंद केशव उपाध्याय, वीरू कुमार गुप्ता, अनिल रात्रे, अजय श्रीवास्तव और चंद प्रकाश पाटले सहित कुछ शिक्षकों के B.Ed. संबंधी दस्तावेजों और विभागीय अनुमति की जांच की मांग की गई है।

डिग्री से लेकर उपस्थिति तक हो जांच

ओमप्रकाश बघेल ने मांग की है कि संबंधित शिक्षकों की B.Ed. डिग्री और अंकसूची की संबंधित विश्वविद्यालय से सत्यता जांच कराई जाए। इसके साथ ही सेवा अवधि की उपस्थिति पंजी, अवकाश रिकॉर्ड, वेतन आहरण विवरण, विभागीय अनुमति के दस्तावेज और विश्वविद्यालय की परीक्षा समय-सारणी व परीक्षा उपस्थिति रिकॉर्ड का मिलान किया जाए।

इस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित शिक्षक सेवा अवधि में विद्यालय में उपस्थित थे या नियमित रूप से B.Ed. अध्ययन एवं परीक्षा में शामिल हो रहे थे।

वरिष्ठता सूची में B.Ed. दर्ज होने पर भी सवाल

मामले में 1 अप्रैल 2026 की स्थिति में जारी प्राविधिक वरिष्ठता सूची को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, कार्योत्तर अनुमति निरस्त होने के बावजूद कुछ शिक्षकों की व्यावसायिक योग्यता के रूप में B.Ed. दर्ज है।

विशेष रूप से वरिष्ठता सूची में क्रमांक 406 पर मुकुंद केशव उपाध्याय और क्रमांक 1291 पर अनिल रात्रे का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि अनुमति निरस्त होने के बाद भी B.Ed. योग्यता सूची में किस आधार पर दर्ज की गई।

जांच पूरी होने तक पदोन्नति लाभ रोकने की मांग

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।

साथ ही मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक विवादित B.Ed. योग्यता के आधार पर किसी भी शिक्षक को पदोन्नति का लाभ न दिया जाए। यदि जांच में गलत जानकारी, कूटरचना या विभाग को गुमराह कर अनुचित लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार विभागीय और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

फिलहाल यह आरोप और जांच की मांग है। संबंधित शिक्षकों की ओर से उनका पक्ष सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

https://www.pdffiller.com/s/fcy-OlarJ2

Leave a Reply

Back to top button