छत्तीसगढ़

वन्यप्राणी संरक्षण के लिए 60 लाख के तकनीकी नवाचार, रेस्क्यू के लिए मिलेगा आधुनिक वाहन..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने और वन्यप्राणियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कांकेर में आयोजित राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में वन मंत्री केदार कश्यप ने तकनीकी नवाचारों के लिए कुल 60 लाख रुपये की मंजूरी की घोषणा की।

वन मंत्री ने वन्यप्राणियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग और मोबाइल अलर्ट सिस्टम विकसित करने की घोषणा की। इसके साथ ही वन्यप्राणियों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस वाहन उपलब्ध कराने की बात भी कही।

भालू और तेंदुओं की गतिविधियों पर रहेगी नजर

वन मंत्री के अनुसार भालू और तेंदुओं की गतिविधियों तथा उनकी लोकेशन की निगरानी के लिए 40 लाख रुपये की लागत से रेडियो कॉलरिंग परियोजना शुरू की जाएगी।

वहीं, 20 लाख रुपये की लागत से AI आधारित मॉनिटरिंग और मोबाइल अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए वन्यप्राणियों की गतिविधियों की निगरानी के साथ संभावित खतरे की सूचना ग्रामीणों को मोबाइल पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

वन मंत्री ने कहा कि वन्यप्राणियों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें भूमिका है। उन्होंने जनसहभागिता के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने का आह्वान किया।

वन्यजीव संरक्षण पर तीन पुस्तकों का विमोचन

समारोह के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत पर आधारित तीन पुस्तकों एवं पुस्तिकाओं का विमोचन किया।

इनमें गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य की जैव-विविधता पर आधारित ‘Gomarda: The Hidden Emerald of Chhattisgarh’, बाघिन के दृष्टिकोण से जंगल के अनुभवों पर आधारित ‘अचानकमार की जीती-जागती कहानी झुमरी की जुबानी’ तथा गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के प्राचीन शैलचित्रों और पुरातात्विक धरोहरों पर केंद्रित ‘Timeless Imprints: Guru Ghasidas Tamor Pingla Tiger Reserve’ शामिल हैं।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मी सम्मानित

राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विधायक आशाराम नेताम, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर, डीएफओ, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

नई तकनीकों के इस्तेमाल से वन्यप्राणियों की गतिविधियों की निगरानी और समय रहते अलर्ट जारी करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही आधुनिक रेस्क्यू वाहन और उपकरणों से वन्यप्राणियों को सुरक्षित बचाने की कार्रवाई को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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