छत्तीसगढ़

सरगुजा की जीवनदायिनी श्याम घुनघुट्टा परियोजना, 63 गांवों के खेतों तक पहुंच रहा सिंचाई का पानी..

रायपुर। सरगुजा जिले में श्याम घुनघुट्टा परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। करीब 35 वर्ष पुरानी इस परियोजना की 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जा रहा है। विशेष रूप से कम बारिश की स्थिति में यह परियोजना किसानों के लिए खेती जारी रखने में मददगार साबित हो रही है।

नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल प्रवाह और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है। करीब 23.81 करोड़ रुपये की लागत से पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य कराया गया है, जिससे लंबे समय से चली आ रही नहरों की क्षति और पानी के रिसाव जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिली है।

35 साल पुरानी नहरों का हुआ जीर्णोद्धार

श्याम घुनघुट्टा परियोजना की नहरें लंबे समय से संचालित होने के कारण कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थीं। नहरों में दरारें पड़ने के साथ कई जगह पानी के रिसाव की समस्या भी सामने आती थी। इसके अलावा जलीय जीव-जंतुओं द्वारा बिल बनाए जाने से भी नहरों को नुकसान पहुंचता था।

इन समस्याओं को दूर करने के लिए जल संसाधन विभाग ने नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग का कार्य कराया। इसके लिए 8 मार्च 2019 को 2381.84 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। कार्य पूरा होने के बाद नहरों की स्थिति में सुधार हुआ और सिंचाई के लिए पानी के प्रवाह तथा वितरण व्यवस्था को मजबूती मिली।

कम बारिश के दौरान किसानों को मिला सहारा

सरगुजा में वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान अल्प वर्षा की स्थिति बनी थी। बारिश कम होने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई को लेकर परेशानी खड़ी हो गई थी। ऐसे समय में श्याम घुनघुट्टा परियोजना की नहर प्रणाली से 63 गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया।

वर्षा पर निर्भर किसानों के लिए जरूरत के समय नहरों से पानी मिलना खेती के लिए महत्वपूर्ण सहारा बना। इससे कम बारिश के बावजूद कृषि गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिली।

236 किलोमीटर नहरों से 63 गांवों तक पानी

परियोजना के तहत करीब 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित है। इसी नेटवर्क के माध्यम से जिले के 63 गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जा रहा है।

नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग के बाद जल प्रवाह में सुधार हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत से पानी के वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिली है। बारिश की अनिश्चितता के बीच यह व्यवस्था किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त सिंचाई स्रोत उपलब्ध करा रही है।

अम्बिकापुर शहर की भी बुझा रही प्यास

श्याम घुनघुट्टा परियोजना केवल किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है। यह अम्बिकापुर शहर की पेयजल व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

अमृत योजना के तहत परियोजना से नगर निगम अम्बिकापुर को प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उपयोग शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

इस तरह एक ही परियोजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर रही है। गांवों में किसानों को सिंचाई का पानी मिल रहा है, वहीं अम्बिकापुर शहर के नागरिकों के लिए पेयजल की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है।

जल प्रबंधन से मजबूत हुई व्यवस्था

पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नहरों की संरचनात्मक स्थिति बेहतर होने से जल प्रवाह में आने वाली बाधाओं और रिसाव को कम करने में मदद मिली है।

श्याम घुनघुट्टा परियोजना इस बात का उदाहरण है कि मौजूदा जल संसाधन संरचनाओं का समय पर रखरखाव और संरक्षण कर सिंचाई एवं पेयजल जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों को लंबे समय तक पूरा किया जा सकता है।

किसानों और शहरवासियों के लिए बनी जीवनदायिनी

करीब 35 वर्ष पुरानी श्याम घुनघुट्टा परियोजना आज सरगुजा जिले की कृषि और पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। 23.81 करोड़ रुपये की लागत से नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग के बाद सिंचाई व्यवस्था को और मजबूती मिली है।

236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली से 63 गांवों को सिंचाई सुविधा मिल रही है, जबकि अम्बिकापुर शहर को भी प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत श्याम घुनघुट्टा परियोजना की यह उपलब्धि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण उदाहरण है। कम बारिश के समय किसानों के खेतों तक पहुंचने वाला पानी जहां उनकी खेती को सहारा दे रहा है, वहीं यही परियोजना शहरवासियों की पेयजल जरूरतों को भी पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।

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