रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित 3,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार करने के बाद मनी ट्रेल को लेकर बड़ा दावा किया है। ED के अनुसार, शराब सिंडिकेट से कथित तौर पर पैदा हुई अवैध नकदी का एक बड़ा हिस्सा रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया गया था।
ED का दावा—राजीव भवन में पहुंचाई गई नकदी
ED की 12 अगस्त 2026 की प्रेस रिलीज के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कथित शराब घोटाले से अर्जित नकदी को सिंडिकेट से जुड़े हैंडलर्स के जरिए रायपुर स्थित तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश कार्यालय ‘राजीव भवन’ तक पहुंचाया गया। एजेंसी का दावा है कि यह रकम रामगोपाल अग्रवाल की कथित भूमिका के तहत वहां डिलीवर की गई।
ED ने यह भी कहा है कि PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए कुछ बयानों में नकदी को संभालने और पहुंचाने वाले लोगों ने इस संबंध में जानकारी दी है। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप और दावे हैं, जिनका अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।
करीब 3,000 करोड़ रुपये के कथित अपराध की कमाई
ED के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र में एक सिंडिकेट के जरिए कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। एजेंसी ने इस नेटवर्क में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी समेत अन्य लोगों की भूमिका का आरोप लगाया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित सिंडिकेट ने वैध शराब बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब वाली देशी शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से वार्षिक कमीशन और FL-10A लाइसेंस से जुड़े कमीशन के जरिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की Proceeds of Crime अर्जित की।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी
ED ने रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। वह पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने 18 अगस्त तक 7 दिन की ED कस्टडी मंजूर की है।
ED के मुताबिक, अग्रवाल को पूछताछ के लिए चार बार समन जारी किए गए थे, लेकिन वह पेश नहीं हुए। बाद में दर्ज बयान में एजेंसी ने उनके जवाबों को टालमटोल वाला बताया।
जांच अभी जारी
ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। इससे पहले जून 2026 में एजेंसी ने शराब घोटाले से जुड़े मामलों में करीब 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के बाजार मूल्य वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की जानकारी दी थी।
महत्वपूर्ण: रामगोपाल अग्रवाल और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में आरोप सिद्ध होना बाकी है।



