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25 साल बाद भी नहीं मिली पारिवारिक पेंशन, HC ने हरियाणा सरकार को 3 महीने में फैसला लेने का दिया आदेश

चंडीगढ़.

पति की करीब 25 वर्ष की सेवा के बावजूद पारिवारिक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को याचिकाकर्ता के मांग पत्र पर तीन माह के भीतर कानून के अनुसार फैसला लेने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ता के 25 मई 2026 के मांग पत्र पर सभी तथ्यों और हाई कोर्ट की पूर्ववर्ती डिवीजन बेंच के फैसले को ध्यान में रखते हुए कारण युक्त एवं स्पष्ट आदेश पारित करे। यदि याचिकाकर्ता राहत की हकदार पाई जाती हैं तो संबंधित लाभ तत्काल प्रदान किए जाएं।

सेवानिवृत्ति लाभों के लिए योग्य सेवा माना जाए: अदालत
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह आदेश जींद निवासी बिमला की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया। याचिका में मांग की गई थी कि उनके दिवंगत पति परमजीत की 18 जुलाई 1994 से पांच दिसंबर 2019 तक की पूरी सेवा को पारिवारिक पेंशन और अन्य पेंशन संबंधी व सेवानिवृत्ति लाभों के लिए योग्य सेवा माना जाए। साथ ही याचिकाकर्ता के मामले को पुरानी पेंशन योजना के तहत मानते हुए पारिवारिक पेंशन, उसके बकाया, महंगाई राहत और सामान्य भविष्य निधि का भुगतान 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि परमजीत को 18 जुलाई 1994 को जिला जींद के राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय, खरैंती में अंशकालिक सफाई कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया था। बाद में 23 अगस्त 2012 के आदेश के माध्यम से उन्हें सफाई कर्मचारी-सह-चौकीदार के पद पर नियमित किया गया। सेवा के दौरान पांच दिसंबर 2019 को उनकी मृत्यु हो गई।

2020 में अनुकंपा के आधार पर मिली नियुक्ति
पति की मृत्यु के बाद सरकार ने उनके बेटे को जून 2020 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भी प्रदान की। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब सरकार ने उनके पति की सेवा के दौरान मृत्यु को स्वीकार करते हुए बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दी, तो इसके बावजूद उनके पक्ष में पारिवारिक पेंशन स्वीकृत नहीं की गई। इस संबंध में उन्होंने 25 मई 2026 को न्यायिक मांग नोटिस भी भेजा, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 26 जुलाई 2024 के जय भगवान मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया। दलील दी गई कि मौजूदा मामले का विवाद उक्त फैसले से पूरी तरह कवर होता है और पेंशन संबंधी पात्रता तय करते समय दिवंगत कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन माह के भीतर मांग नोटिस पर कारण युक्त और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए। निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को तत्काल दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता मांगी गई राहत की हकदार पाई जाती हैं तो सक्षम प्राधिकारी उन्हें वह लाभ तत्काल प्रदान करे।

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