चंडीगढ़.
जननायक जनता पार्टी (जजपा) के प्रमुख एवं पूर्व सांसद डॉ. अजय सिंह चौटाला ने जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले को लेकर एक बार फिर अपनी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज करने के संकेत दिए हैं।
चंडीगढ़ में छात्र संगठन इनसो के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उन्हें केवल ''भाई साहब'' शब्द की पहचान के आधार पर साजिश के आरोप (धारा 120-बी) में दोषी ठहराया गया, जबकि भर्ती प्रक्रिया में उनकी कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं थी। हाई कोर्ट द्वारा संबंधित जेबीटी भर्तियों को वैध ठहराए जाने के बाद चौटाला ने अब अपनी सजा को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
हरियाणा सरकार के किसी पद पर नहीं था: अजय चौटाला
अजय चौटाला ने कहा कि वह न तो हरियाणा सरकार में किसी पद पर थे और न ही जिला या ब्लॉक स्तर की उन समितियों के सदस्य थे, जिनके माध्यम से तत्कालीन चौटाला सरकार में 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती हुई थी। उनके अनुसार, भर्ती सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी थी तथा उनका उससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। बता दें कि इनेलो की राजनीति में भाई साहब शब्दों का इस्तेमाल उस समय अजय सिंह चौटाला और मौजूदा इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला के लिए होता था। अभी भी इन दोनों दलों में अजय सिंह और अभय सिंह को भाई साहब कहकर संबोधित किया जाता है। दोनों भाइयों में इस समय जबरदस्त राजनीतिक मुटाव हैं।
आइएएस अधिकारी ने कही थी ये बात
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन आइएएस अधिकारी रजनी शेखर सिब्बल ने पहले केवल इतना कहा था कि एक बैठक में ''भाई साहब'' नाम से संबोधित व्यक्ति मौजूद था, लेकिन करीब 10 वर्ष बाद उसी अधिकारी ने यह पहचान अजय चौटाला के रूप में बताई। चौटाला का कहना है कि इसी बदले हुए बयान के आधार पर उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। उन्होंने कहा कि अब जबकि हाई कोर्ट ने जेबीटी भर्ती प्रक्रिया को सही माना है, ऐसे में उस पूरे मामले की कानूनी पृष्ठभूमि पर नए सिरे से सवाल खड़े हुए हैं। चौटाला ने कहा कि उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी इसी मामले में 10 वर्ष की सजा काट चुके हैं और अब इस दुनिया में नहीं हैं। स्वयं उन्होंने भी 10 वर्ष का कठोर कारावास भुगता है।
बयान केवल व्यक्तिगत सफाई नहीं
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो अजय चौटाला का यह बयान केवल व्यक्तिगत सफाई नहीं, बल्कि जेबीटी प्रकरण की पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने और उसे नए सिरे से राजनीतिक विमर्श का विषय बनाने की रणनीति माना जा रहा है। हाई कोर्ट के हालिया फैसले को आधार बनाकर जजपा इस मुद्दे को अपने पक्ष में जनमत तैयार करने और यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि यदि भर्ती प्रक्रिया वैध थी तो साजिश के आरोपों की भी दोबारा न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा इसी रणनीति का अगला कदम मानी जा रही है।



