दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग बस स्टैंड पर पुलिस, चाइल्डलाइन और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की संयुक्त कार्रवाई में 7 नाबालिगों सहित कुल 16 युवाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। प्रारंभिक जांच में मामला बाल तस्करी और अवैध बाल श्रम से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मिली गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार देर शाम टीम ने बस स्टैंड पर कार्रवाई की। सभी बच्चे कबीरधाम जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी और 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन का लालच देकर रायपुर और उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था, जबकि उन्हें अपनी अंतिम मंजिल तक की जानकारी नहीं थी।
रेस्क्यू के दौरान बच्चों ने बताया कि वे सुबह से भूखे-प्यासे सफर कर रहे थे। प्रशासन ने पहले सभी को भोजन कराया, फिर काउंसिलिंग और दस्तावेजों का सत्यापन कराया। सभी नाबालिगों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर शेल्टर होम भेज दिया गया है।
कार्रवाई के दौरान बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, जिससे पूछताछ जारी है। पुलिस को शक है कि उसके तार किसी अंतरराज्यीय गिरोह या ठेकेदार नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यदि बाल तस्करी या अवैध श्रम की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



