छत्तीसगढ़

कोरिया कांड के बाद रेत माफिया पर सियासत तेज, भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा..

बलौदाबाजार। कोरिया जिले में रेत कारोबार से जुड़े विवाद में कार को आग के हवाले किए जाने और दो लोगों की मौत के मामले के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में रेत कारोबार चर्चा का विषय बन गया है। घटना के बाद रेत माफिया, अवैध खनन और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इस बीच बलौदाबाजार जिले में प्रशासन ने हालात सामान्य होने का दावा किया है।

कोरिया की घटना ने प्रदेशभर में रेत कारोबार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि मामले में जुड़े कुछ लोगों के राजनीतिक संबंध भी रहे हैं। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हर पहलू की पड़ताल जारी है।

बलौदाबाजार में 15 रेत घाट, लेकिन हालात सामान्य

बलौदाबाजार जिले से महानदी और शिवनाथ जैसी प्रमुख नदियां गुजरती हैं। इन नदियों पर करीब 15 रेत घाट संचालित हैं। हालांकि वर्तमान में अधिकांश घाट बंद बताए जा रहे हैं। जिले में अब तक रेत कारोबार को लेकर कोरिया जैसी हिंसक घटना सामने नहीं आई है।

अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में खनिज विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है। वहीं ओवरलोड वाहनों के खिलाफ यातायात विभाग भी लगातार अभियान चला रहा है।

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जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने कहा कि जिले में रेत कारोबार को लेकर गैंगवार जै

गवार जैसी स्थिति नहीं : अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

सी कोई स्थिति नहीं है। रेत से जुड़े मामलों में मुख्य कार्रवाई खनिज विभाग करता है। यदि कानून-व्यवस्था या रेत चोरी से संबंधित कोई मामला सामने आता है तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करती है।

भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना

बलौदाबाजार पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरिया की घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार रेत कारोबार को लेकर इस तरह की हत्या की घटना सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध खनन प्रशासन के संरक्षण में चल रहा है और सरकार इस पर नियंत्रण करने में विफल रही है।

प्रशासन की सतर्कता पर टिकी नजर

बलौदाबाजार की सीमाएं रायपुर और महासमुंद जैसे जिलों से जुड़ी हैं, जहां से रेत का परिवहन लगातार होता है। ऐसे में प्रशासन की निगरानी और सतर्कता को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोरिया की घटना प्रदेश के लिए चेतावनी साबित होगी? और क्या रेत कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य में कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से स्पष्ट होंगे।

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