छत्तीसगढ़

अवैध कब्जों पर प्रशासन का शिकंजा, दुर्ग में रेलवे किनारे चला बुलडोजर..

दुर्ग । नगर निगम ने गुरुवार सुबह रेलवे लाइन से लगे बोरसी भाठा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में निगम ने चार अवैध दुकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।

सुबह तड़के नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण स्थलों पर अंतिम नोटिस चस्पा करने के बाद जेसीबी मशीनों से अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

जानकारी के अनुसार, पहले एसडीएम न्यायालय ने रेलवे लाइन किनारे बने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। प्रभावित पक्षों ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन करीब एक सप्ताह पहले एसडीएम कोर्ट ने सभी अपीलें खारिज कर दीं, जिसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

प्रशासन के मुताबिक हाईकोर्ट ने कुल 37 दुकानों और मकानों को हटाने के निर्देश दिए थे। हालांकि इनमें से 33 प्रभावित पक्षों को न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) मिल गया, जिसके चलते फिलहाल उन पर कार्रवाई रोक दी गई। केवल चार ऐसे निर्माण थे जिनके पास कोई स्टे नहीं था, इसलिए उन्हें ध्वस्त किया गया।

कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, एसडीएम कार्यालय के अधिकारी, तहसीलदार और बड़ी संख्या में पुलिस जवान सुबह से ही मौके पर तैनात रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया।

इधर, पाटन तहसील के ग्राम अमलीडीह में भी अवैध भूमि विकास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित कर बिना अनुमति सड़क, बाउंड्रीवाल और अन्य निर्माण कार्य किए गए थे, जिससे भूमि का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया था।

छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माणों को हटाया। विभाग के अधिकारियों के अनुसार संबंधित कंपनी को पहले नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की गई।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि, रेलवे लाइन और शासकीय संपत्तियों पर अवैध कब्जे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। जिन मामलों में न्यायालय से राहत नहीं मिली है, वहां आगे भी इसी प्रकार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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