श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर काफी लगाम लगी है। आंकड़े भी इसके गवाही दे रहे हैं। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2021 से लेकर अब तक घाटी में आतंकवादी नेटवर्क में स्थानीय लोगों की भर्ती काफी कम हुई है। यह संख्या 2021 में जहां 146 थी, वही अब घटकर 2025 में सिर्फ एक रह गई। मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2025 में घुसपैठ की सिर्फ छह कोशिशें हुईं, जो पिछले पांच सालों में सबसे कम हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में 146 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए। इसके बाद 2022 में 121, 2023 में 19, 2024 में चार और 2025 में सिर्फ एक युवा शामिल हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और वे सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का लाभ उठा रहे हैं।
अनुच्छेद 370 हटने से पस्त हुआ पाकिस्तान
आपको बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है। इस इलाके में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और आतंकवादियों की भर्ती में भारी कमी आई है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर हालात काफी शांत हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में घुसपैठ की छह कोशिशों को नाकाम किया गया, जिनमें 12 आतंकवादी मारे गए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "2021 में घुसपैठ की 8 कोशिशें नाकाम की गईं और 12 आतंकवादी मारे गए। वहीं, 2022 में घुसपैठ की 12 कोशिशें नाकाम और 18 आतंकवादी मारे गए, 2023 में घुसपैठ की 18 कोशिशें नाकाम और 36 आतंकवादी मारे गए, 2024 में घुसपैठ की 10 कोशिशें नाकाम और 19 आतंकवादी मारे गए।"
अब जम्मू से घुसपैठ की फिराक में आतंकी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भले ही नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशें कम हुई हैं, लेकिन आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशें अब जम्मू इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर ज्यादा हो रही हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिशें भी की जा रही हैं।
मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि घुसपैठ की कोशिशों में कमी के बावजूद 2025 में सीजफायर उल्लंघन में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में LoC पर सीजफायर उल्लंघन की दो घटनाएं हुईं। वहीं, 2025 में कम से कम 163 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ। उनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में केंद्र शासित प्रदेश में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई।



