भोपाल
इस साल दीपावली रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन बुधादित्य योग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस बार माता महालक्ष्मी गज वाहन पर सवार होकर आएंगी। ज्योतिर्विद के अनुसार, रविवार को दीपावली पड़ना और माता का गज वाहन पर आगमन व्यापार, व्यवसाय और किसानों के लिए शुभ संकेत है।
12 महीनों में कार्तिक मास का खास महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हुई है। कार्तिक मास को 12 महीनों में विशेष महत्व दिया गया है। इस महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं।
इनमें रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, नरक चतुर्दशी और दीपावली प्रमुख हैं। वहीं, शुक्ल पक्ष में अन्नकूट, भाई दूज, सौभाग्य पंचमी, सूर्य छठ पूजा, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है।
एक दिन दो त्योहारों की स्थिति
मान्यता अनुसार, भारतीय ज्योतिष शास्त्र में तिथियों की गणना स्थानीय मानक समय और भारतीय मानक समय के अंतर के कारण अलग-अलग स्थितियां बनाती है। इसी वजह से कुछ त्योहारों की तिथियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
धनतेरस 6 नवंबर को मनाई गई। धन त्रयोदशी का पर्व प्रदोष काल से जुड़ा है। त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी।
नरक चतुर्दशी पर दीप श्राद्ध की परंपरा
नरक चतुर्दशी ब्रह्म मुहूर्त का पर्व है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पितरों के निमित्त उल्का दान यानी दीप श्राद्ध करने की परंपरा है। इसलिए इसे प्रात:काल का पर्व माना गया है।
चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या शुरू हो जाएगी। इस तरह 8 नवंबर को दिनभर अमावस्या तिथि रहेगी।
उल्लू पारंपरिक वाहन, गज समृद्धि का प्रतीक
मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी का उल्लू पारंपरिक वाहन है। कुछ पंचांगों और ज्योतिषीय मान्यताओं में दीपावली के दिन माता लक्ष्मी के आगमन के वाहन का उल्लेख किया जाता है।
उल्लू वाहन: माता लक्ष्मी का पारंपरिक वाहन उल्लू है। यह अंधकार में भी देखने की क्षमता का प्रतीक है। इसका संदेश है कि धन-संपत्ति मिलने पर भी मनुष्य को अपना विवेक और सही-गलत की पहचान नहीं खोनी चाहिए।
गज (हाथी) वाहन: हाथी शक्ति, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक है। माता लक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप में हाथी उनका अभिषेक करते हैं। इसे सुख, शांति, धन-धान्य और संपन्नता का शुभ संकेत माना जाता है।



