रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में तसर रेशम यानी कोसा पालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन रहा है। इस व्यवसाय के माध्यम से आदिवासी परिवारों और ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इसी दिशा में बीजापुर जिले में तसर पालन करने वाले 13 हितग्राहियों को स्वस्थ डिम्ब समूह वितरित किए गए हैं। इस योजना के तहत शासन ने आर्थिक सहायता भी प्रदान की है, जिससे ग्रामीणों को कम लागत में कोसा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
13 हितग्राहियों को मिले 3,700 स्वस्थ डिम्ब समूह
बीजापुर जिले के ग्राम कोत्तापल्ली में रेशम विभाग द्वारा तसर पालकों को स्वस्थ डिम्ब समूह उपलब्ध कराए गए। कुल 3,700 स्वस्थ डिम्ब समूह वितरित किए गए, जिनकी कीमत 59,200 रुपये है। इसमें शासन की ओर से 51,800 रुपये की सब्सिडी दी गई, जबकि हितग्राहियों को केवल 7,400 रुपये का अंशदान करना पड़ा।
इस आर्थिक सहायता से तसर पालकों की शुरुआती लागत कम होगी और उन्हें गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
वैज्ञानिक पद्धति से तसर पालन को मिलेगा बढ़ावा
ग्राम कोत्तापल्ली स्थित शासकीय कोसा बीज केंद्र से जुड़े हितग्राहियों को केंद्रीय रेशम बोर्ड की इकाई बीएसएमटीसी, बस्तर से प्राप्त पालित प्रजाति के स्वस्थ डिम्ब समूह वितरित किए गए हैं।
स्वस्थ डिम्ब समूहों के उपयोग से तसर रेशम के कीट पालन में बेहतर परिणाम और गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन करने में सहायता मिलेगी।
ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर जोर
तसर पालन वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का एक माध्यम है। इससे ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही काम करने और अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में इस तरह की योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।
बीजापुर में 13 तसर पालकों को मिली यह सहायता ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और कोसा उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक पहल है।



