छत्तीसगढ़

KBC इनाम के नाम पर 7.90 लाख की ठगी, फर्जी सिम रैकेट का खुलासा..

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत रायपुर रेंज साइबर थाना पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड के जरिए संचालित बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो POS (प्वाइंट ऑफ सेल) एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को बेचते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश प्रजापति (23), निवासी छतरपुर (मध्यप्रदेश) और मनोज देवांगन (29), निवासी खैरागढ़ के रूप में हुई है।

KBC में इनाम और अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर ठगी

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल ‘कौन बनेगा करोड़पति (KBC)’ में इनाम जीतने का झांसा, सोशल मीडिया पर दोस्ती, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे कई साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना क्षेत्र में एक पीड़ित को फेसबुक पर दोस्ती कर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए फंसाया गया। अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी गई और करीब 7.90 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। वहीं दूसरे मामले में KBC में इनाम जीतने का झांसा देकर टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठी गई।

दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक्टिवेट करते थे अतिरिक्त सिम

तकनीकी जांच और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे नए सिम लेने या सिम पोर्ट कराने आने वाले ग्राहकों के आधार कार्ड और ई-केवाईसी का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड चालू कर लेते थे।

बाद में इन सिम कार्डों को अधिक कीमत पर साइबर ठगों को बेच दिया जाता था, जिनका इस्तेमाल देशभर में ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता था।

दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अंजान लोगों से सतर्क रहें, किसी भी इनाम, लॉटरी या KBC के नाम पर आने वाले कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

Leave a Reply

Back to top button