छत्तीसगढ़

नकटी विस्थापन विवाद गरमाया: सीएम हाउस पहुंचा ग्रामीणों का हुजूम, जमीन और मुआवजे की मांग; कांग्रेस ने दी छत्तीसगढ़ बंद की चेतावनी..

रायपुर। राजधानी रायपुर में शुक्रवार को नकटी गांव के विस्थापन का मामला और गरमा गया। अपने घर टूटने और पुनर्वास की मांग को लेकर सैकड़ों प्रभावित ग्रामीण मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। इससे पहले उन्होंने मंत्री ओपी चौधरी के सरकारी बंगले और रायपुर कलेक्ट्रेट के बाहर भी प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री आवास के बाहर देर रात तक धरना चलता रहा, जहां भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने विधायक कॉलोनी के लिए उनके वर्षों पुराने आशियाने तोड़ दिए, लेकिन सभी प्रभावित परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जमीन वापस देने, तोड़े गए मकानों का मुआवजा देने और आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की।

धरने के दौरान ग्रामीण मुख्यमंत्री आवास के बाहही भोजन करने बैठ गए। इस दौरान पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुबह से भूखे-प्यासे बैठे लोगों को भोजन करने से भी रोका जा रहा है। बाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों के बीच भोजन वितरित किया।

आंदोलन के बीच जिला प्रशासन ने 10 महिला प्रतिनिधियों को कलेक्टर से मिलने बुलाया। प्रतिनिधिमंडल ने गांव की जमीन वापस दिलाने, मकानों के नुकसान का उचित मुआवजा और दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग रखी। कलेक्टर ने उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया।

प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर गरीबों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बुलडोजर कार्रवाई को “अमानवीय” बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं विनोद तिवारी, श्री कुमार मेनन और पप्पू बंजारे ने कहा कि यदि सरकार ने तय समय में मांगें नहीं मानीं तो पहले राज्यपाल से मुलाकात की जाएगी और उसके बाद पूरे छत्तीसगढ़ में आंदोलन और बंद का आह्वान किया जाएगा।

गौरतलब है कि 29 जून को माना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का दावा है कि प्रभावित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाया जा रहा है। वहीं, गृह निर्माण मंडल का कहना है कि लगभग 15 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सभी प्रभावित परिवारों को आवास नहीं मिला है और बरसात के बीच उन्हें बेघर कर दिया गया।

इस पूरे विवाद के बीच रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मुख्यमंत्री को लिखी एक वर्ष पुरानी चिट्ठी भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने गरीब परिवारों को हटाने पर आपत्ति जताई थी। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि बुलडोजर कार्रवाई से दो दिन पहले सांसद ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में कोई तोड़फोड़ नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई कर दी गई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पांच दिन के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। दूसरी ओर प्रशासन पुनर्वास की प्रक्रिया जारी होने का दावा कर रहा है। ऐसे में नकटी गांव का विवाद अब प्रशासनिक मुद्दे से आगे बढ़कर राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता नजर आ रहा है।

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