नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचल अबूझमाड़ में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की संयुक्त पहल से सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इससे उन दूरस्थ गांवों और पारा-टोलों के लोगों को राहत मिल रही है, जहां पहले पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या ग्रामीण झिरिया के पानी पर निर्भर रहते थे।
371 गांवों और पारा-टोलों तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य
नारायणपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगल और दूर-दूर बसी आबादी पेयजल सुविधाएं पहुंचाने में बड़ी चुनौती हैं। इन क्षेत्रों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 371 गांवों एवं पारा-टोलों के लिए कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्रेडा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रयासों से अब तक 849 पंप स्थापित किए जा चुके हैं। शेष पंपों की स्थापना का कार्य जारी है। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता को बेहतर बनाना है।
बिजली पर निर्भरता कम, सौर ऊर्जा से चल रहे पंप
सोलर ड्यूल पंपों की खासियत यह है कि ये सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। इससे उन इलाकों में भी पेयजल व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल रही है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है या बिजली पहुंचाना कठिन है।
नेलांगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका जैसे दुर्गम गांवों में पंप स्थापित किए जाने से ग्रामीणों को अपने आसपास पानी उपलब्ध कराने में मदद मिली है। इससे पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो रही है और लोगों के समय व श्रम की बचत हो रही है।
महिलाओं और परिवारों को मिल रही राहत
पेयजल की सुविधा बेहतर होने से ग्रामीण महिलाओं को विशेष राहत मिल रही है। पहले पानी जुटाने में काफी समय और मेहनत लगती थी। अब आसपास पानी उपलब्ध होने से महिलाएं घरेलू कार्यों, बच्चों की देखभाल और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के लिए अधिक समय निकाल सकती हैं।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। सुरक्षित पानी तक बेहतर पहुंच से दूषित जल के कारण होने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
सौर ऊर्जा से ग्रामीण विकास को बढ़ावा
जल जीवन मिशन और क्रेडा की यह पहल दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। सोलर ड्यूल पंपों की स्थापना से दूरस्थ बसाहटों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
नारायणपुर जिले में 1,064 पंपों के लक्ष्य के मुकाबले 849 पंप स्थापित हो चुके हैं। शेष कार्य पूरा होने के साथ अधिक गांवों और पारा-टोलों तक पेयजल सुविधा पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह पहल अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीणों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



