नई दिल्ली
UPI पर 0.4 फीसदी MDR ( Merchant Discount Rate) लगाने का सरकार का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. यूपीआई से भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर (MDR) लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सोमवार यानी 28 सितंबर 2026 को कोर्ट ने इस मामले में RBI और यूपीआई का प्रबंधन देखने वाली संस्था NPCI को नोटिस जारी किया. हालांकि नए MDR स्ट्रक्चर पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया. माने 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया नियम फिलहाल अपनी तय समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर से 2,000 से ज़्यादा के कुछ खास UPI 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाना है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कई सवाल जरूर किए हैं।
MDR से कौन कमाई करेगा?
सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने पूछा है कि आखिर इस एमडीआर से कमाई किसे हो रही है और यह चार्ज कोई फीस है या फिर एक तरह का टैक्स? आजतक की अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने पूछा है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगाए जाने वाले इस चार्ज से कौन कमाई करेगा? इसमें कौन सी टैक्स देने वाली संस्था शामिल है? कोर्ट ने चार हफ्तों में सरकार से स्थिति साफ करने को कहा है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने बहस में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन पेश हुए।
यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के सवालों का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिनका जवाब सरकार से मांगा गया है. कोर्ट ने सरकार और केंद्रीय बैंक से MDR को लेकर ये भी पूछा है कि अगर एक टैक्सपेयर से दूसरे टैक्सपेयर के पास कैश जाता है, तो उस पेमेंट का कानूनी स्वरूप आखिर क्या होगा?
UPI MDR पर वित्त मंत्री ने दी थी ये सफाई
बता दें कि यूपीआई एमडीआर से जुड़ा नोटिफिकेशन नेशनल पेमेंट बैंक कॉर्पोरेशन (NPCI) की ओर से जारी किए जाने के बाद विपक्ष इसे लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए नजर आई. बीते सप्ताह खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ट्रांजैक्शन चार्ज को तस्वीर साफ की थी।
वित्त मंत्री ने साफ किया था कि यह 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा था, 'UPI Payment MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस है. यह पैसा भारत के कंसोलिडेटेड फंड में जमा नहीं होगा, बल्कि यह सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा सिस्टम को बेहतर बनाने और अच्छी सर्विस देने के लिए लगाया जाने वाला चार्ज है, छोटे ट्रांजैक्शन के लिए तो बिल्कुल नहीं.' FM के मुताबिक, यह एमडीआर ऑपरेटर्स के बीच का चार्ज है, इसका बोझ कंज्यूमर पर नहीं डाला जाएगा।
कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है।
किसने लगाई है याचिका?
यूपीआई पर MDR लगाने के विरोध में एडवोकेट अंजन दत्ता ने PIL दाखिल की है. याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है. याचिका में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में किए गए बदलाव की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाया गया है।
क्या है MDR?
15 अक्टूबर से 2000 रुपये के 'पर्सन-टू-मर्चेंट' पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. हालांकि ये चार्ज ग्राहक को नहीं, बल्कि दुकानदार को देना होगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर 5 रुपए का फ्लैट MDR लगेगा. वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है. पर्सन टू पर्सन यानी एक-दूसरे को यूपीआई से लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं है।



