मध्य्प्रदेश

अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

भोपाल 

इस वित्तीय वर्ष 2026-2027 में मध्यप्रदेश सरकार ने बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर सड़क, बांध, बिजली, नहर निर्माण सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय का लक्ष्य रखा है। इस राशि में राज्य की अपनी आय, विभिन्न निगमों के संसाधन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जुटाए जाने वाले ऋण सहित अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं। वास्तविक उपलब्धता और व्यय बजट दस्तावेजों तथा वर्ष के दौरान जारी आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों से स्पष्ट होंगे।

विकास परियोजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रावधान इसीलिए संभव हो सका है, क्योंकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में हर वर्ष निरंतर वृद्धि हो रही है। जीएसडीपी में बढ़ोतरी होने से राज्य सरकारों की ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है, हालांकि ऋण की वास्तविक सीमा केंद्र सरकार के नियमों, राजकोषीय उत्तरदायित्व प्रावधानों और अन्य वित्तीय मानकों पर निर्भर करती है। मध्यप्रदेश सरकार इस बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता का उपयोग उपरोक्त विकास परियोजनाओं के लिए कर रही है।

इस लक्ष्य का उद्देश्य प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाना है। मध्यप्रदेश में सड़क क्षेत्र की कई परियोजनाओं के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित कार्य भी विभिन्न चरणों में संचालित हैं। इन परियोजनाओं की लागत, वित्तपोषण व्यवस्था और प्रगति का आकलन संबंधित विभागों तथा केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इन परियोजनाओं के अंतर्गत बांध, नहर और अन्य जल-संरचनाओं के निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा बिजली, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यों पर होने वाला व्यय परियोजना-विशिष्ट स्वीकृतियों, चरणबद्ध बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा।

इतने बड़े निवेश कार्यक्रम की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि बजट में किए गए प्रावधान वास्तविक परिसंपत्तियों में कितनी तेजी और दक्षता से परिवर्तित होते हैं। परियोजनाओं में समय और लागत की वृद्धि को नियंत्रित करना, भुगतान व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखना तथा प्रत्येक परियोजना के परिणामों की नियमित निगरानी करना वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना धन की व्यवस्था करना।
इस लिहाज से सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाना और दूसरी ओर राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना। 

यदि राजस्व संसाधनों में वृद्धि, ऋण प्रबंधन, व्यय की प्राथमिकता और परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन कायम रहता है, तो एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तावित निवेश प्रदेश की दीर्घकालीन अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सरकार के निर्धारित निवेश लक्ष्य का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करना और प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना है। हालांकि, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि लक्ष्य या बजट अनुमान को दर्शाती है; इसे वास्तविक व्यय नहीं माना जा सकता। निर्धारित प्रावधान, ऋण से प्राप्त राशि और परियोजनावार वास्तविक खर्च का अंतिम आकलन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद उपलब्ध आधिकारिक लेखा और वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।

"हर जगह, हरसंभव—प्रदेश विकास में सहभागिता” की भावना के साथ अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों से विकास की गति तेज होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
एक लाख करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर व्यय से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

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