रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था के संचालन और क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश 2026 जारी कर दिए हैं। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पात्र कर्मचारी और उनके आश्रित सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर निर्धारित नियमों के अनुसार बिना अग्रिम भुगतान के इलाज करा सकेंगे।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य इलाज के दौरान कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति की लंबी प्रक्रिया से राहत दिलाना है। अभी तक कई मामलों में कर्मचारियों को पहले अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ता है। इसके बाद मेडिकल बिल और जरूरी दस्तावेज जमा कर प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। नई कैशलेस व्यवस्था से इस परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है।
ई-हेल्थ कार्ड से मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा
नई व्यवस्था के तहत ई-हेल्थ कार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकारी कर्मचारियों की पहचान उनकी Employee ID के आधार पर की जाएगी। वहीं, उनके आश्रित परिवार के सदस्यों की पात्रता का सत्यापन आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों के माध्यम से किया जाएगा।
संबंधित अधिकारियों द्वारा पात्रता की जांच और अनुमोदन के बाद ई-हेल्थ कार्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पूरी डिजिटल व्यवस्था को विकसित करने में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की तकनीकी सहायता ली जाएगी। इससे कर्मचारी और उनके आश्रितों की पहचान, इलाज की स्वीकृति तथा भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन व्यवस्थित किया जा सकेगा।
अस्पताल में भर्ती होने पर मिलेगा कैशलेस इलाज
दिशा-निर्देशों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होकर कराए जाने वाले उपचार यानी IPD को मुख्य रूप से कैशलेस सुविधा के दायरे में रखा गया है। पात्र कर्मचारी और उनके आश्रित निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
हालांकि, सामान्य ओपीडी उपचार के लिए व्यवस्था अलग होगी। OPD में होने वाले इलाज का खर्च पहले की तरह लागू चिकित्सा प्रतिपूर्ति नियमों के अनुसार मिलेगा। इसका मतलब यह है कि नई व्यवस्था में हर तरह का इलाज कैशलेस नहीं होगा। सुविधा का लाभ उपचार की प्रकृति, पात्रता और निर्धारित शर्तों के आधार पर मिलेगा।
इलाज की राशि की तय होगी सीमा, अतिरिक्त खर्च खुद उठाना होगा
सरकार ने कैशलेस इलाज के भुगतान के लिए निर्धारित दरों और सीमाओं का भी प्रावधान किया है। इसके तहत CGHS की बी-1 श्रेणी के शहरों के लिए निर्धारित पैकेज दर अथवा अस्पताल के वास्तविक उपचार खर्च में से जो राशि कम होगी, उसी के आधार पर भुगतान तय किया जाएगा।
यदि इलाज का खर्च निर्धारित सीमा से अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि संबंधित कर्मचारी को स्वयं देनी पड़ सकती है। इसलिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले उपचार की पैकेज दर, स्वीकृति और संभावित अतिरिक्त खर्च की जानकारी लेना जरूरी होगा।
24 घंटे टोल-फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन शिकायत सुविधा
योजना के प्रभावी संचालन के लिए कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत 24 घंटे संचालित होने वाले टोल-फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन शिकायत सुविधा का प्रावधान रखा गया है।
इस माध्यम से ई-हेल्थ कार्ड, पात्रता सत्यापन, अस्पताल में कैशलेस इलाज और भुगतान से जुड़ी समस्याओं की शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। इससे कर्मचारियों को योजना का लाभ लेने के दौरान आने वाली परेशानियों के समाधान में मदद मिलेगी।
अब ई-हेल्थ कार्ड और अस्पतालों की सूची का इंतजार
राज्य सरकार द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद अब योजना के वास्तविक क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। ई-हेल्थ कार्ड बनाने की शुरुआत, डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार होने और सूचीबद्ध अस्पतालों की जानकारी जारी होने के बाद पात्र कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
फिलहाल सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के संचालन की रूपरेखा जारी की है। कर्मचारियों को योजना के लागू होने, अस्पतालों की सूची और ई-हेल्थ कार्ड से संबंधित आगामी आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
कुल मिलाकर, यह व्यवस्था लागू होने पर छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में आर्थिक राहत मिल सकती है। खासकर गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान पहले बड़ी रकम जुटाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है। 







