छत्तीसगढ़

बस्तर के दूरस्थ गांवों तक पहुंचेगी सड़क, सचिव भीम सिंह ने दिए शत-प्रतिशत सर्वे के निर्देश; लापरवाही पर होगी कार्रवाई..

रायपुर। नक्सलवाद से मुक्त हो चुके बस्तर संभाग और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार अब शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (सीजीआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भीम सिंह ने बस्तर संभाग के सभी क्षेत्रों का शत-प्रतिशत सर्वे कराकर हर पात्र गांव और बसाहट तक सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सचिव भीम सिंह शुक्रवार को रायपुर स्थित विकास भवन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (एमएमजीएसवाई) के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। बैठक में योजनावार और जिलावार प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, समय-सीमा, संधारण और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई।

पीएमजीएसवाई-1 के शेष काम छह महीने में पूरे करने के निर्देश

सचिव भीम सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के सभी शेष कार्य आगामी छह माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएं। साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा।

बस्तर के हर पात्र गांव को सड़क से जोड़ने पर जोर

भीम सिंह ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति से बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के नए अवसर मिले हैं। अब इन क्षेत्रों के प्रत्येक पात्र गांव और बसाहट तक सड़क पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में अब तक सड़क संपर्क नहीं है, उनका व्यापक सर्वेक्षण किया जाए। कोई भी पात्र गांव या बसाहट सड़क सुविधा से वंचित नहीं रहनी चाहिए। नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।

पीएम जनमन के तहत मार्च 2027 तक 828 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य

बैठक में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत सड़क निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। सचिव ने मार्च 2027 तक लक्ष्य के अनुरूप 828 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने योजना के तहत स्वीकृत सभी सड़क निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा से पहले पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने को कहा। इसके साथ ही पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।

लापरवाही पर कार्यपालन अभियंता के खिलाफ कार्रवाई, उप अभियंता निलंबित

सड़क निर्माण कार्यों में देरी और अनियमितताओं को लेकर सचिव ने कड़ा रुख अपनाया। कवर्धा जिले में सड़क निर्माण की धीमी प्रगति के मामले में तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

वहीं, बलरामपुर जिले के राजपुर में सड़क निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में लापरवाही के मामले में संबंधित उप अभियंता को निलंबित करने और पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और गड़बड़ी के मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी।

भारी वाहनों पर CCTV से निगरानी, नियम तोड़ने पर चालानी कार्रवाई

पीएमजीएसवाई के तहत बनी ग्रामीण सड़कों को भारी वाहनों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। सचिव ने इन मार्गों पर पोस्टर और बैनर लगाकर निर्धारित भार क्षमता तथा भारी वाहनों के आवागमन संबंधी प्रतिबंधों की जानकारी देने को कहा।

उन्होंने बताया कि आगामी समय में इन सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की जाएगी।

प्लास्टिक से सड़क निर्माण में महिला समूहों की भागीदारी

सचिव भीम सिंह ने तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अनुपयोगी प्लास्टिक के संग्रहण और उठाव में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने को कहा। इससे प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग के साथ समूहों के लिए आजीविका के अवसर भी विकसित हो सकेंगे।

निर्माण सामग्री और संधारण की व्यवस्था पर भी निर्देश

बैठक में सड़क निर्माण के लिए बिटुमिन की संभावित कमी को देखते हुए ठेकेदारों को आवश्यक कच्ची सामग्री की अग्रिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्य संबंधित विभागों से समन्वय कर जल्द पूरा कराने और पीएम गतिशक्ति योजना के अंतर्गत जरूरी सड़कों को जोड़ने को कहा गया।

सचिव ने पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के लंबित भुगतान का शीघ्र निराकरण करने और सड़कों का संधारण निर्धारित मानकों के अनुसार कराने के निर्देश भी दिए। गौरव पथ निर्माण के दौरान भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सेवाओं के लिए डक्ट का प्रावधान अनिवार्य करने को कहा गया, ताकि बाद में पाइपलाइन या अन्य सेवाओं के विस्तार के लिए सड़कों को बार-बार खोदना न पड़े।

बैठक में प्रमुख अभियंता के.के. कटारे, राज्य गुणवत्ता समन्वयक अमित गुलहरे, मुख्य अभियंता एमएमजीएसवाई वरुण राजपूत, मुख्य अभियंता संधारण नवीन मेहता सहित सभी सर्कल के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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