बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में एक बार फिर पोस्टिंग को लेकर विवाद सामने आया है। गंभीर आरोपों में निलंबित किए गए शिक्षक की बहाली के बाद मनचाहे स्कूल में पदस्थापना किए जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला बिलासपुर संभाग के संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय से जुड़ा है, जहां शिक्षक की पोस्टिंग को लेकर जेडी और संबंधित स्कूल के प्रधान पाठक के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्व माध्यमिक शाला पदमपुर में पदस्थ शिक्षक भोला देव ध्रुव को मूल्यांकन कार्य के दौरान स्ट्रॉन्ग रूम प्रभारी से अभद्रता, परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने और एक महिला शिक्षिका को आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोप में निलंबित किया गया था। विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबन के साथ एक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने की सजा भी दी गई थी।
निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद शिक्षक की बहाली कर उन्हें जनपद मिडिल स्कूल, तखतपुर में पदस्थ कर दिया गया। इस पोस्टिंग को लेकर अब विवाद गहरा गया है। आरोप है कि जिस स्कूल में उन्हें भेजा गया है, वहां पहले से ही पर्याप्त शिक्षक कार्यरत हैं।
विवाद तब और बढ़ गया जब जनपद मिडिल स्कूल तखतपुर के प्रधान पाठक बृजेश शर्मा ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने स्कूल में शिक्षक की कमी को लेकर विभाग को कोई आवेदन नहीं भेजा। दूसरी ओर, संयुक्त संचालक (जेडी) अश्विनी भारद्वाज का कहना है कि प्रधान पाठक के आवेदन के आधार पर ही शिक्षक की पोस्टिंग की गई है।
दोनों अधिकारियों के विरोधाभासी दावों के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सही कौन बोल रहा है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई ने पोस्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा तेज है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस पूरे विवाद की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।



