'बॉर्डर' में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले कर्नल जोशी हों या 'गदर' में हैंडपंप उखाड़ने वाले तारा सिंह एक्टर सनी देओल हमेशा एक देशभक्त हीरो के तौर पर जाने गए हैं. कड़क आवाज, तीखे तेवर और 'ढाई किलो के हाथ' ने सनी देओल को भारतीय सिनेमा का सबसे दमदार हीरो बनाया है. उन्होंने जब भी पर्दे पर देश के विरोधियों को ललकारा, सिनेमाघर दर्शकों की तालियों से गूंज उठे. उन्होंने अपने किरदारों से यह साबित किया कि सच्चा हीरो धर्म से नहीं, अपने कर्मों से पहचाना जाता हैl
सनी देओल की अदाकारी सिर्फ एक सीमित दायरे में कैद नहीं रही. भले ही ज्यादातर लोग उन्हें हिंदू या सिख देशभक्त के रूप में याद रखते हैं. मगर सनी ने पर्दे पर कई दफा मुस्लिम किरदार निभाया. उन्होंने अपने किरदारों से हमेशा इंसानियत और फर्ज की मिसाल कायम की. फिर चाहे सिस्टम से जंग लड़नी हो, सरहद की हिफाजत करनी हो या फिर 1947 के बंटवारे का दर्द हो… सनी देओल ने हमेशा मुस्लिम किरदारों में भी अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है l
मुस्लिम किरदारों में दिखा सनी का दम
1947 के विभाजन के खूनी दौर पर बनी फिल्म 'बंटवारा 1947' में सनी देओल ने मुस्लिम किरदार निभाया है. फिल्म में वो 'सिकंदर मिर्जा' की भूमिका निभाते दिखेंगे. जब चारों तरफ नफरत की आग लगी है, उस वक्त सिकंदर के किरदार में सनी पाकिस्तान की धरती पर खड़े होकर इंसानियत, ममता और भाईचारे का झंडा बुलंद करते हुए नजर आएंगे. फिल्म में वो अपनी ही कौम के कट्टरपंथियों से टकराकर एक बेसहारा बुजुर्ग हिंदू महिला की जान बचाते दिखेंगे. जोश, जज्बे और देशभक्ति से भरपूर 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर दर्शकों को काफी पसंद आया है. अब हर किसी को फिल्म का इंतजार है. मगर उससे पहले जानते हैं कि 'बंटवारा 1947' से पहले सनी ने किन फिल्मों में मुस्लिम किरदार निभाया है l
'खुदा कसम'
फिल्म 'खुदा कसम' में सनी देओल ने 'हुसैन' नाम के एक सीधे-सादे और ईमानदार मुस्लिम ट्रक ड्राइवर का किरदार निभाया था. एक गहरी साजिश के तहत हुसैन को झूठे केस में फंसाया जाता है, तब भी वो टूटता नहीं है. वो अकेले ही पूरे भ्रष्ट तंत्र और दुश्मनों से भिड़ जाता है. इंसाफ की इस लड़ाई में सनी देओल का गुस्सा और उनका जुनून देखने लायक था l
'काफिला'
फिल्म 'काफिला' में सनी देओल कर्नल समीर अहमद खान के किरदार में नजर आए थे. इस फिल्म में वो एक पूर्व सैन्य अधिकारी बने, जो देशवासियों की सुरक्षा और इंसानियत के लिए अपनी जान हथेली पर रख देता है. कर्नल समीर के रूप में सनी देओल ने साबित किया कि देश प्रेम और फर्ज का कोई अलग धर्म नहीं होता l
अंत में यही कहेंगे कि सनी देओल को किसी एक खांचे में बांधना नामुमकिन है. एक तरफ जहां वो देशभक्त सिख या हिंदू बनकर पाकिस्तान को ललकारते हैं, वहीं सिकंदर मिर्जा और हुसैन बनकर वो नफरत की दीवारें भी तोड़ते हैं. क्यों सही कहा ना हमने?



