रायपुर। 23 जून को होने वाली NEET- PG परीक्षा भी स्थगित कर दी गई। केंद्र सरकार ने शनिवार 22 जून की रात 9 बजे NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया। NTA ही वो सरकारी एजेंसी है, जो NEET जैसी परीक्षा कंडक्ट करती है। IAS सुबोध सिंह इसके प्रमुख अधिकारी थे।
NEET से हटाए गए सुबोध सिंह छत्तीसगढ़ के कैडर के IAS अफसर हैं। एक समय रायपुर के कलेक्टर थे। डॉ रमन सिंह की सरकार में वरिष्ठ अफसरों में इनकी गिनती होती थी। पिछले साल 2023 में ही इन्हें NTA का महानिदेशक बनाया गया था। 1997 बैच के सुबोध सिंह को हटाए जाने के बाद अब NTA के DG कर्नाटक कैडर के 1985 बैच के रिटायर्ड आईएएस प्रदीप खरोला बनाए गए हैं।
क्या है NEET विवाद ?
नीट-यूजी में बहुत अधिक नंबर दिए जाने के आरोप लगे हैं। जिस कारण रिकॉर्ड 67 उम्मीदवारों ने परफेक्ट स्कोर के साथ टॉप रैंक हासिल किया है। 67 को 720 में से 720 नंबर मिल गए। पिछले साल टॉप रैंक पर दो छात्र आए थे।
छात्रों का आरोप है कि कई उम्मीदवारों के अंकों को घटाया या बढ़ाया गया है। जिससे उनकी रैंक प्रभावित हुई है। 6 केंद्रों पर परीक्षा में देरी के कारण समय की बर्बादी की भरपाई के लिए 1,500 से अधिक छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क्स भी जांच के दायरे में हैं।
पेपर लीक होने के भी आरोप लगे हैं। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पिछले महीने कहा था कि उसे जांच से पता चला है कि 5 मई की परीक्षा से पहले लगभग 35 उम्मीदवारों को नीट-यूजी के प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। इस मामले में अब तक 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
शिक्षक का बेटा देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी का चीफ बना
कानपुर निवासी सुबोध सिंह के पिता प्राइमरी स्कूल के शिक्षक रहे हैं। देश की टॉप परीक्षाएं NTA कराती है। इस एजेंसी के वो चीफ बने, मगर परीक्षा के विवाद के बाद उन्हें हटा दिया गया। 15 अगस्त 1973 को जन्में सुबोध सिंह ने आईआईटी रुड़की से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की है। उन्होंने इग्नू से एमबीए भी किया है।
जब अफसर बने तो छत्तीसगढ़ MP का ही हिस्सा था। उन्हें पहली पोस्टिंग 1998 में मंडला जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में मिली। 2002 में रायगढ़ जिले के कलेक्टर बनाए गए। इसके बाद मार्कफेड और नान के एमडी, पशु संचालनालय के डायरेक्टर रहे। 2005 में रायपुर के कलेक्टर बनाए गए थे। इसके बाद बिलासपुर के कलेक्टर बने और फिर से रायपुर के कलेक्टर बनाए गए। दोनों जिलों में सिटी बस सेवा शुरू करने का श्रेय उन्हें जाता है।
रायपुर कलेक्टर से उन्हें हाउसिंग बोर्ड का कमिश्नर बनाया गया। जून 2009 में वे मुख्यमंत्री सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी बने। इसके बाद 2018 तक रहे। सरकार बदली तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सुबाेध दिल्ली चले गए थे।



