रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने गुरुवार को गुस्से का ज्वालामुखी फोड़ दिया। 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारियों और अधिकारियों में जबरदस्त नाराज़गी देखने को मिली। नतीजा यह रहा कि रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक, शासकीय कार्यालय सूने पड़े रहे और अधिकांश स्कूलों पर ताले लटक गए।
इंद्रावती भवन में फिर तालाबंदी की नौबतआज से शुरू हुए बेमुद्दत हड़ताल के मद्देनजर इंद्रावती भवन में एक बार फिर तालाबंदी की नौबत बन गई है।कांग्रेस शासनकाल के दौरान फेडरेशन के बैनर तले बेमुद्दत हड़ताल के दौरान 17 दिनों तक कामकाज प्रभावित हुआ था। एक बार फिर दफ्तरों में कामकाज ठप होने की नौबत बनते दिखाई दे रही है।
धरना स्थल पर जमकर हो रही नारेबाजी-
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी नजर आ रही है। पदाधिकारियों की मौजूदगी में कर्मचारी अपनी मांगों के संबंध में जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
ये है फेडरेशन की प्रमुख मांगे
केंद्र सरकार के समान कर्मचारियों एवं पेंशनरों को देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) लागू किया जाए।
DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए।
सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
लिपिकों, शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए।
प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए संपूर्ण सेवा लाभ दिया जाए।
पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
नगरीय निकाय के कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति दिया जाए।अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण की जाए।
प्रदेश में कैशलेश सुविधा लागू की जाए।
दैनिक,अनियमित,संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की ठोस नीति बने।सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष की जावे।



