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‘2027 में सपा की बची-खुची इज्जत भी चली जाएगी’, कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर का तंज

'ओवैसी की भीड़ देखकर गोपनीय सर्वे करा रहे अखिलेश', राजभर बोले- मुस्लिम वोटों पर सपा की पकड़ हो रही कमजोर

'यूपी में ओवैसी की सक्रियता ने अखिलेश यादव के उड़ाए होश', राजभर बोले- इस बार सपा को मुस्लिम सिखाएगा सबक

'सपा ने मुसलमानों को सिर्फ दरी बिछाने तक सीमित रखा', राजभर का अखिलेश पर हमला; बोले- अब हिस्सेदारी मांगेगा मुस्लिम समाज

'आजमगढ़ में भी अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी', राजभर का दावा- इस बार सपा का बुरा हाल होगा

लखनऊ
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखकर अखिलेश यादव डरे हुए हैं और AIMIM के साथ गठबंधन के फायदे-नुकसान को लेकर सपा गोपनीय सर्वे करा रही है।

राजभर ने कहा कि यूपी में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता ने सपा को चिंता में डाल दिया है। सपा से अब मुस्लिम समाज अपनी हिस्सेदारी मांग रहा है क्योंकि उसे यह एहसास हो गया है कि अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को केवल धोखा दिया है।

'मुसलमानों के नेता अब ओवैसी हैं, अखिलेश नहीं'
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी ने पहले ही अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन तब सपा ने इसपर ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब ओवैसी की रैलियों में आ रही भारी भीड़ को देखते हुए सपा गोपनीय सर्वे कराने में जुट गई है।

राजभर ने कहा कि ओवैसी जिन राज्यों में सक्रियता से चुनाव लड़ते हैं, वहां मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा उनकी पार्टी की ओर जाता है। राजभर ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां RJD नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ओवैसी को हल्के में लेने की गलती की थी। राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी ओवैसी की सक्रियता सपा के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन को प्रभावित कर सकती है।

'सपा ने मुसलमानों को दरी बिछाने तक सीमित रखा'
राजभर ने सपा पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में मुस्लिम विधायक, सांसद और नेता होने के बावजूद कोई अखिलेश यादव से यह मांग करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि मुस्लिम समाज के समर्थन के बदले उसे सत्ता में नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।

राजभर ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को सपा में बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी देने के बजाय उसे पार्टी के लिए काम करने तक सीमित रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज सपा को लगातार समर्थन देता रहा है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की मांग क्यों नहीं उठती?

राजभर ने कहा कि ओवैसी इसी सवाल को उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज को अब केवल किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाने की राजनीति करने के बजाय अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नौकरी और सत्ता में भागीदारी पर भी ध्यान देना चाहिए।

'20 प्रतिशत वाला हिस्सेदारी की बात करेगा'
राजभर ने कहा कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर विधानसभा में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में है और उसे किसी दूसरे दल पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रतिनिधित्व की मांग करनी चाहिए।

राजभर ने कहा कि पहले मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहता था, लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रहेगी। राजभर के मुताबिक, ओवैसी और पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब की सक्रियता से मुस्लिम मतदाताओं के सामने दूसरे राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं।

आजमगढ़ में अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी
राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना ओवैसी को आजमगढ़ में करीब तीन प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन इस बार ओवैसी अभी से सक्रिय हैं। इस बार आजमगढ़ में भी सपा का बुरा हाल होगा।

'2017 में जो इज्जत बची थी, वह भी चली जाएगी'
राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट सपा को नहीं मिलेगा। अखिलेश यादव और सपा को लेकर मुस्लिमों में भयानक नाराजगी है। राजभर ने कहा कि इस बार के चुनाव में सपा का पूरा सफाया हो जाएगा। जो इज्जत 2017 में बच गई थी वो भी 2027 में चली जाएगी।

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