छत्तीसगढ़

बस्तर के जनजातीय बच्चे देश को दिखा रहे नई राह..

रायपुर। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले का जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। कभी दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच शिक्षा के अवसर तलाशने वाले बच्चे आज उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, खेल और रोजगार के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं।

दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के अनुसार एजुकेशन सिटी में एक ही परिसर में प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक नि:शुल्क आवासीय शिक्षा की व्यवस्था है और यहां करीब 7,000 बच्चे अध्ययन करते हैं। जिले में शिक्षा पर केंद्रित इन पहलों ने दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए शिक्षा और अवसरों का दायरा बढ़ाया है।

150 एकड़ के परिसर में शिक्षा और कौशल का संगम

जावंगा की एजुकेशन सिटी में स्कूल शिक्षा के साथ आवासीय सुविधाएं, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े संस्थान संचालित होते हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रहने, भोजन और मार्गदर्शन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) के दस्तावेज के अनुसार, एजुकेशन सिटी के मॉडल से नामांकन, विद्यार्थियों के ठहराव और शिक्षा के परिणामों में सुधार दर्ज किया गया है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और कई बच्चे सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित परिवारों से हैं।

NEET से मेडिकल कॉलेज तक पहुंच रहीं बेटियां

एजुकेशन सिटी से जुड़ी ‘छू लो आसमान’ जैसी पहल के जरिए छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर मिल रहे हैं। यहां से पढ़ने वाली कई छात्राओं ने NEET-UG में सफलता हासिल कर मेडिकल और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की दिशा में कदम बढ़ाया है।

इन उपलब्धियों ने उन परिवारों के लिए शिक्षा के नए रास्ते खोले हैं, जहां बेटियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले आसान नहीं थी। बालिका शिक्षा पर विशेष जोर के कारण छात्राओं को सुरक्षित आवासीय वातावरण में पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल रहा है।

डिजिटल शिक्षा से रोजगार तक का सफर

जावंगा में शिक्षा के साथ युवाओं को आधुनिक कौशल से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। नवगुरुकुल जैसी पहल के माध्यम से डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दंतेवाड़ा प्रशासन के अनुसार जिले की कौशल एवं डिजिटल शिक्षा पहलों से प्रशिक्षित युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिले हैं। जिला प्रशासन अपनी शिक्षा संबंधी पहल में रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बताता है।

खेल के मैदान में भी निखर रही प्रतिभा

एजुकेशन सिटी में पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी सुविधाएं विकसित की गई हैं। तीरंदाजी, स्विमिंग, हॉर्स राइडिंग और अन्य खेल गतिविधियों के जरिए बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

खेल के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के साथ अपनी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने का मंच मिल रहा है।

बेटियों की शिक्षा पर विशेष फोकस

जावंगा एजुकेशन सिटी की पहलों में बालिका शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। छात्रावास, भोजन, पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाओं के जरिए दूरस्थ इलाकों की छात्राओं को लगातार पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है।

दंतेवाड़ा प्रशासन के अनुसार ‘छू लो आसमान’ और अन्य शैक्षणिक नवाचारों ने जिले के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और करियर के नए अवसर खोले हैं।

शिक्षा के जरिए बदली तस्वीर

दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और लंबे समय तक संघर्ष प्रभावित रहे क्षेत्र में शिक्षा को विकास का आधार बनाने की कोशिशों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। DARPG के दस्तावेज में ‘Educational Initiatives in Dantewada’ को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के पुरस्कार प्राप्त पहलों में शामिल किया गया है। वहीं दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के अनुसार एजुकेशन सिटी को KPMG की ओर से दुनिया की 100 नवोन्मेषी पहलों में स्थान मिला था।

जावंगा एजुकेशन सिटी की कहानी इस बात को सामने लाती है कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास, कौशल प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे उच्च शिक्षा, रोजगार और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। बस्तर के इन जनजातीय बच्चों की उपलब्धियां अब उनके गांवों से निकलकर देश के अलग-अलग मंचों तक पहुंच रही हैं।

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