छत्तीसगढ़

4.27 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा, बिल्डर ने फर्जी तरीके से बनाया पट्‌टा, कॉलोनी बनने से पहले SDM ने सरकारी रिकार्ड में दर्ज करने दिया आदेश..

बिलासपुर। एक बिल्डर ने सरकारी जमीन का फर्जी पट्‌टा बनवा कर उस पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद उसने किसान की खड़ी फसल पर 50 ट्रक मिट्‌टी डलवा कर 40 फीट रास्ता भी बना लिया। मामला सामने आने पर कलेक्टर अवनीश शरण ने एसडीएम मनीष साहू से जांच कराई, तब जमीन का फर्जी पट्‌टा बनाने की जानकारी मिली। फजीवाड़ा सामने आने पर एसडीएम ने पट्‌टा निरस्त कर जमीन को सरकारी रिकार्ड में दर्ज करने का आदेश दिया है। पूरा मामला कोनी-रतनपुर मार्ग स्थित सेंदरी की बेसकीमती जमीन का है।

एसडीएम मनीष साहू ने तहसीलदार मुकेश देवांगन से पूरे मामले की जांच कराई, तब पता चला कि सेंदरी पटवारी हल्का नंबर 46 स्थित भूमि खसरा नंबर 1309 रकबा 7.57 एकड़ भूमि मिसल रिकार्ड में घास मद में दर्ज है। रिकार्ड में खसरा नंबर 1309/1 रकबा 4.27 एकड़ रघुवीर सिंह व अन्य के नाम दर्ज थी। वहीं, 1309/1 रकबा 4.27 एकड़ भूमि चरागाह मद में दर्ज है। शिकायतकर्ता ईश्वर पिता कुंजराम ने बताया है कि शासन से उसे कोई पट्टा प्राप्त नहीं हुआ है। उक्त भूमि पर उसका कब्जा था, जिसे उसने राजेश अग्रवाल पिता बजरंग अग्रवाल को पांच लाख रुपए में बेच दिया था।

बिल्डर ने औने-पौने दाम में खरीदी करोड़ों की सरकारी जमीन

जिसके बाद स्पष्ट हुआ कि राजेश अग्रवाल ने बिना किसी दस्तावेज के ईश्वर से जमीन पांच लाख रुपए में खरीदी है। इस पर एसडीएम ने राजेश अग्रवाल और सुभाष चंद्र मिश्रा से जवाब मांगा, तब उन्होंने बताया कि 1309/3 रकबा एक एकड़ भूमि को कलेक्टर के माध्यम से 4 फरवरी 2009 को विक्रय के लिए आदेश प्राप्त कर ईश्वर पिता कुंजराम से खरीदा है। जबकि, खसरा नंबर 1309/9 राजस्व अभिलेखों में दर्ज ही नहीं रहा। एसडीएम साहू की जांच में यह भी पता चला कि राजस्व रिकार्ड में ईश्वर पिता कुंज राम के नाम जारी पट्टा संलग्न ही नहीं है। वहीं, रकबा 4.27 एकड़ भूमि चरागाह मद में दर्ज है।

रातों-रात बनी 40 फीट सड़क, शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशाासन

सेंदरी निवासी गेंदराम ने कलेक्टर से शिकायत की। उसने बताया कि उसकी फसल को नुकसान पहुंचाकर 40 से 50 फीट सड़क बना ली गई है। कलेक्टर अवनीश शरण ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एसडीएम को जांच के निर्देश दिए। जब तहसीलदार ने ईश्वर राम लहरे का बयान दर्ज किया, तब पता चला कि इस जमीन पर वो सालों से खेती कर रहा था। उसने खसरा नंबर 1300/1 की 1 एकड़ सरकारी जमीन के लिए पट्टे की मांग की थी, लेकिन उसे कोई पट्टा नहीं मिला। उसे यह भी नहीं पता कि खसरा नंबर 1309/3 की 1 एकड़ जमीन उसके नाम पर कैसे दर्ज हो गई। उसने यह भी कहा कि यह जमीन राजेश पिता बजरंग अग्रवाल को 5 लाख रुपए में अंगूठा लगाकर कब्जा दिया है। जिसके बाद सुभाष चंद्र मिश्रा और जय गुरुदेव स्ट्रक्चर का पूरा कारनामा सामने आया।

एसडीएम ने सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का दिया आदेश

एसडीएम मनीष साहू ने तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर आदेश दिया कि ईश्वर राम लहरे ने जो 1 एकड़ जमीन राजेश अग्रवाल को बेची, वह अवैध रूप से उसके नाम दर्ज हुई थी। वर्ष 2008-09 में अतिरिक्त कलेक्टर के आदेश में ईश्वर राम के नाम कोई पट्टा संलग्न नहीं था। इसलिए 4 फरवरी 2009 को दी गई अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। एसडीएम ने खसरा नंबर 1309/3 की 1 एकड़ जमीन को विलोपित कर खसरा नंबर 1309/1 की 4.27 एकड़ जमीन को छत्तीसगढ़ शासन के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।

बिल्डर को फायदा पहुंचाने राजस्व अफसरों ने किया खेल

सरकारी जमीन में हेराफेरी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था। इसमें तत्कालीन राजस्व अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहा है। आखिरकार, उन्होंने करोड़ों रुपए कीमती सरकारी जमीन को बिना किसी दस्तावेज के कैसे बिल्डर के नाम कर दिया। उनकी भूमिका को लेकर जिला प्रशासन के अफसरों ने जांच के बाद कार्रवाई करने का दावा किया है।

भाजपा नेता के दबाव में रास्ता, सौदा बिगड़ने पर उजागर कराया मामला

करोड़ों रुपए कीमती सरकारी जमीन के इस बंदरबाट में प्रभावशाली भाजपा नेता की भूमिका अहम है। बताया जा रहा है कि राजस्व अफसरों ने पहले उनके दबाव में आकर किसान की जमीन को पाटकर रास्ता देने के लिए बिल्डर को पहले अनुमति दे दी। इस बीच बिल्डर ने किसान को बिना सूचना दिए रातों रात खड़ी फसल पर मिट्टी पटवा दिया। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा नेता और बिल्डर के बीच रास्ता दिलाने के लिए सौदा हुआ था, वह बिगड़ गया, जिससे नाराज होकर भाजपा नेता ने दबाव बनाकर बिल्डर को सबक सिखाने के लिए उसके काले कारनामा को ही उजागर करा दिया। इसे लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगी है।

Leave a Reply

Back to top button