
रायपुर
बस्तर, दन्तेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा एवं कोण्डागांव जिले में बस्तर फाईटर आरक्षक के 300-300 कुल 2100 स्वीकृत पदों की चयन सूची जारी की गई हैं
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग के वनांचल क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा एवं विकास कार्यों में स्थानीय युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर सहित क्षेत्र में सकारात्मक योगदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बस्तर फाईटर्स नामक विशेष बल के गठन हेतु नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई।
इन स्वीकृत नवीन पदों में बस्तर, दन्तेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा एवं कोण्डागांव जिले में बस्तर फाईटर आरक्षक के 300-300 कुल 2100 पदों स्वीकृत किए गए हैं।
बस्तर फाईटर्स आरक्षक भर्ती प्रक्रिया अंतर्गत माह मई-जून में शारीरिक दक्षता परीक्षा (100 अंको) में योग्य पाये गये 5405 उम्मीद्वारों के लिए बस्तर संभाग के कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, बस्तर, दन्तेवाड़ा, बीजापुर एवं सुकमा जिला मुख्यालय में 17 जुलाई 2022 को 50 अंको की लिखित परीक्षा संपन्न की गई। उक्त लिखित परीक्षा में संभाग के कुल 5330 उम्मीदवार शामिल हुये।
बस्तर फाईटर आरक्षक पद हेतु शारीरिक दक्षता परीक्षा एवं लिखित परीक्षा में प्राप्तांको (मेरिट क्रमानुसार) के आधार पर बस्तर संभाग में कुल 3969 उम्मीदवारों का 01 अगस्त से 10 अगस्त 2022 तक संबंधित सभी जिला मुख्यालय में 20 अंको का साक्षात्कार लिया गया। समस्त प्रक्रिया पूर्ण कर बस्तर फाईटर आरक्षक पद हेतु 15 अगस्त 2022 को उम्मीदवारों की चयन एवं प्रतीक्षा सूची जारी कर दी गई है।
बस्तर फाइटर आरक्षक भर्ती के लिए चयनित 295 अभ्यर्थियों में अनारक्षित (पुरुष) – 23, अनारक्षित (महिला) – 10, अन्य पिछड़ा वर्ग (पुरुष) – 29, अन्य पिछड़ा वर्ग (महिला) – 13, अनुसूचित जाति (पुरुष) – 2, अनुसूचित जाति (महिला) – 4, अनुसूचित जनजाति (पुरुष) – 149 और अनुसूचित जनजाति (महिला) के 64 अभ्यर्थियों नियुक्ति के लिए पात्र हैं.उक्त भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले के 295 युवक युवतियों को नौकरी मिली है. वहीं अनुसूचित जाति के 5 पद योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने से रिक्त हैं.
अंदरूनी वनांचल क्षेत्र में रूबरू होने के दौरान बल सदस्यों को स्थानीय बोली की जानकारी नही होने से अनेक प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। बस्तर फाईटर आरक्षक भर्ती में जिले के स्थानीय भर्ती होने के साथ-साथ क्षेत्र की बोली के जानकार अभ्यर्थियों के चयन होने पर भाषा की चुनौती को दूर करने के साथ-साथ स्थानीय जनता एवं पुलिस के संबंध को और भी मजबूती मिलेगी।



