रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर महिलाओं की राय और सुझाव सामने आ रहे हैं। रायपुर जिले के धरसींवा और गरियाबंद जिले से आईं विभिन्न महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने रायपुर में आयोजित चर्चा के दौरान समिति के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। महिलाओं ने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने, पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने और विवाह व तलाक से जुड़े नियमों को अधिक समान बनाने की मांग की।
बैठक में समान नागरिक संहिता समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत तथा वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के विचार सुने। समिति की ओर से इन सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने के लिए विचार करने का आश्वासन दिया गया।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने का सुझाव
चर्चा के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे महिलाओं के शोषण को रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के पालन-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
महिलाओं ने स्वतंत्रता, समानता और न्याय के सिद्धांतों को प्राथमिकता देते हुए धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों में आवश्यक बदलावों पर विचार करने की बात भी कही।
पैतृक संपत्ति में महिलाओं को समान अधिकार देने की मांग
महिला प्रतिनिधियों ने पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि महिलाओं को संपत्ति के मामले में समान अवसर और अधिकार मिलना चाहिए।
इसके अलावा, तलाक की प्रक्रिया को आपसी सहमति के आधार पर सरल बनाने और दहेज से संबंधित नियमों में समानता लाने के सुझाव भी रखे गए। महिलाओं ने कहा कि कानूनों का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए।
जनजातीय परंपराओं और संस्कृति के सम्मान पर जोर
बैठक में छत्तीसगढ़ की जनजातीय आबादी और स्थानीय सामाजिक विविधता को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। महिला प्रतिनिधियों ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर विचार करते समय स्थानीय समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति का सम्मान किया जाना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने यह भी कहा कि कानूनों और सरकारी व्यवस्थाओं से मिलने वाला लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए महिलाओं में कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
महिला जागरूकता को बताया जरूरी
चर्चा के अंत में महिला प्रतिनिधियों ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर विचार-विमर्श के दौरान महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनों की जानकारी होगी, तभी वे अपने हितों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकेंगी।
समिति के सदस्यों ने महिलाओं के सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें रिपोर्ट में शामिल करने के लिए विचार करने की बात कही। इस चर्चा के माध्यम से लिव-इन रिलेशनशिप, संपत्ति अधिकार, तलाक, दहेज और जनजातीय परंपराओं जैसे विषयों पर महिलाओं की राय सामने आई।



