छत्तीसगढ़

RSS की तीन दिवसीय बैठक: RSS की समन्वय बैठक में मोहन भागवत, राष्ट्रीय पदाधिकारी सहित, भाजपा के दिग्गज भी होंगे शामिल..

रायपुर

विश्व के सबसे बड़े संगठन RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक पहली बार राजधानी में होगी। इसमें सर संघ चालक मोहन भागवत के साथ संघ परिवार के 37 आनुषांगिक संगठनों के 200 से ज्यादा अखिल भारतीय पदाधिकारी आगामी कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। यह बैठक 10, 11 व 12 सितंबर को एयरपोर्ट के सामने स्थित जैनम मानस भवन में होगी। इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी तीन दिन का समय बिताएंगे। सारे पदाधिकारी 9 सितंबर तक पहुंच जाएंगे। RSS के स्थानीय स्वयंसेवक जो व्यवस्था में रहेंगे, उनके अलावा किसी को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं होगी। RSS के पदाधिकारियों के मुताबिक सभी आनुषांगिक संगठनों के प्रमुख सालभर के जो कार्य निर्धारित किए गए थे, उस पर अपनी रिपोर्ट देंगे। साथ ही, बाकी संगठनों से जो अपेक्षाएं थीं, उस पर भी अपनी बात रखेंगे। RSS की यह बैठक हर साल होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बैठक तेलंगाना और राजस्थान में हुई थी।

RSS के 37 आनुषांगिक संगठन हैं। इनमें पॉलिटिकल फ्रंट बीजेपी है। सभी संगठनों के अपने अलग-अलग काम हैं। हर साल होने वाली समन्वय बैठक में सभी संगठनों के प्रमुख पिछली बैठक में तय किए गए कार्यों की रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके बाद आगामी कार्ययोजना बताएंगे। इसमें सर संघ चालक मोहन भागवत अपनी ओर से मार्गदर्शन देंगे। जो कमियां रह गईं, उसके संबंध में बताएंगे।

RSS की समन्वय बैठक से पहले अलग-अलग विभागों की बैठकें शुरू हो जाएंगी। इसमें सभी निचले स्तर की रिपोर्ट लेकर एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिस समन्वय बैठक में पेश किया जाएगा। संभवत: बीजेपी अध्यक्ष नड्‌डा व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी भाजपा पदाधिकारियों की बैठक ले सकते हैं। इस संबंध में शनिवार को सुबह एक बैठक रखी गई है।

RSS के सभी संगठनों की अपनी अलग कार्ययोजना होती है, लेकिन यह माना जाता है कि इन कार्यों का लाभ भाजपा को मिलता है। इसके विपरीत 2018 के चुनाव में आरएसएस की नाराजगी की बात सामने आई थी, जिसकी वजह से भाजपा को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा। समन्वय बैठक में इन बिंदुओं पर बात होगी कि RSS ने क्या सुझाव दिए थे और भाजपा ने क्या किया।

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