मोदी 2.0: बीजेपी ने दस महीने में कांग्रेस से छीन ली दो राज्यों की सत्ता

News Desk

 
नई दिल्ली
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा की दूसरी पारी जीतने के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद हैं. पिछले दस महीनों में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में हारी हुई दो राज्यों की बाजी को अपने नाम कर लिया है. बीजेपी ने कांग्रेस के दो राज्यों की सत्ता को अपने नाम कर लिया है. लोकसभा चुनाव के फौरन बाद बीजेपी ने पहले कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के हाथों से सत्ता छीनी तो अब मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया है.

मध्य प्रदेश में पिछले 17 दिनों से चल रहे सियासी घमासान के बीच शुक्रवार को कमलनाथ ने राजभवन जाकर राज्यपाल लालजी टंडन को इस्तीफा सौंप दिया है. इसी के साथ मध्य प्रदेश की कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी सरकार की सत्ता से विदाई हो गई है. इस्तीफे से पहले कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में बीजेपी को शासन के लिए 15 साल मिले थे और जनता ने हमें पांच साल के लिए चुना था, लेकिन साजिश के तहत महज 15 महीने दिए गए.
 
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मैदान में उतरी थी और कांग्रेस ने कमलनाथ की अगुवाई में चुनाव लड़ा था. प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 114, बीजेपी ने 109, बसपा ने 2, सपा ने 1 और चार निर्दलीय जीते थे. कमलनाथ ने सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी.

बीजेपी ने 15 महीने के बाद मध्य प्रदेश में ऑपरेशन लोटस के जरिए कमलनाथ की सत्ता छीन ली है. इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अहम किरदार निभाया है, जिन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा. उनके 22 समर्थक विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिसकी वजह से कमलनाथ को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हालांकि, कमलनाथ ने अपनी सरकार को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली.
 

लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने सबसे पहले ऑपरेशन लोटस को कर्नाटक में आजमाया. मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के हाथ मिलाने के बाद सत्ता पर काबिज होने के बीजेपी के अरमानों पर पानी फिर गया था.

कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-जेडीएस के 17 विधायकों ने बगावत कर दी. इसके अलावा दो निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी. इसके बाद कई दिनों तक चले सियासी नाटक के बाद 23 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फ्लोर टेस्ट हुआ और कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई थी और सरकार गिर गई थी. इसके बाद बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी और बागी विधायकों ने कमल का दामन थाम लिया था.

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