सिंघु बॉर्डर पर लाश मिलने का मामला: राजेवाल ने निहंग सिखों, भाजपा ने राकेश टिकैत पर लगाए आरोप

News Desk

 
नई दिल्ली

दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर (सिंघु बॉर्डर) पर किसानों के धरना-स्‍थल पर एक शख्‍स का शव मिला है। प्रथमदृष्टया लगता है कि 35 साल के इस शख्स की बर्बरता से हत्या की गई है। लाश को बैरिकेड से लटकाया गया था और एक हाथ भी काटा गया था। इस घटना को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि घटना के पीछे निहंग सिख हो सकते हैं। वहीं भाजपा ने इसके लिए राकेश टिकैत के लखीमपुर खीरी की घटना के बाद दिए बयानों को जिम्मेदार बताया है।

 किसान आंदोलन
भाजपा के आईटी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट कर लिखा- बलात्कार, हत्या, वैश्यावृत्ति, हिंसा और अराजकता… किसान आंदोलन के नाम पर यह सब हुआ है। अब हरियाणा के कुंडली बॉर्डर पर युवक की बर्बर हत्या. आखिर हो क्या रहा है? किसान आंदोलन के नाम पर यह अराजकता करने वाले ये लोग कौन हैं जो किसानों को बदनाम कर रहे हैं? इसके बाद मालवीय ने लिखा, अगर राकेश टिकैत ने लखीमपुर में मॉब लिंचिंग को सही नहीं ठहराया होता तो शायद कुंडली सीमा पर एक युवक की हत्या नहीं हुई होती। किसानों के नाम पर इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे की अराजकतावादियों को बेनकाब करने की जरूरत है।

राजेवाल ने निहंग सिखों की ओर उठाई उंगली

संयुक्त किसान मोर्चा नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने आरोप लगाया है कि सिंघु सीमा पर एक बैरिकेड से लटके हुए व्यक्ति की हत्या के पीछे निहंग सिखों का हाथ है। राजेवाल ने कहा, घटना के पीछे निहंग हैं। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। निहंग शुरू से ही हमारे लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान मोर्चा जांच में सहयोग करेगा। हत्या के पीछे जो लोग भी शामिल हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पुलिस ने कहा है कि अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। डीएसपी हंसराज ने कहा कि अभी यह कहना बहुत जल्दबादी होगी कि इसके पीछे कौन है। हम मामले की जांच कर रहे हैं।

क्या है घटना

दिल्ली के सिंघ बॉर्डर पर शुक्रवार सुबह किसानों के धरना स्थल के मंच के पास शख्स का शव एक बैरिकेड्स से लटका मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सोनीपत भेज दिया है। मृतक के शरीर पर धारदार हथियार से हमले के निशान हैं और उसका एक हाथ कटा हुआ है। बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में हजारों किसान सिंघु बॉर्डर पर करीब एक साल से प्रदर्शन कर रहे हैं।

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