Type 2 diabetes वाले यह चीज़ , इससे कंट्रोल होगा आपका ब्लड शुगर

News Desk

टाइप 2 डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसे डायबिटीज का सबसे आम रूप माना जाता है। खून में शुगर लेवल बढ़ जाने से टाइप 2 डायबिटीज होती है। इसे पूरी तरह तो ठीक करना संभव नहीं है, लेकिन फिर भी सही आहार और दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

अगर आप भी डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले कुछ जरूरी खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो इसमें एक और नाम शामिल कर लीजिए , वो है बाजरा। जी हां, हाल ही में हुए International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics (ICRISAT) के एक अध्ययन से पता चला है कि बाजरा खाने से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है और मधुमेह वाले लोगों में ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में मदद मिलती है।

​भारत का पारंपरिक अनाज है बाजरा

बाजरा भारत में खाए जाने वाले पारंपरिक अनाज में से एक है। यह सदियों से चावल और गेहूं के साथ हमारे आहार का हिस्सा रहा है। इसमें अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट के कारण बाजरा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने का बेहतरीन तरीका है। बाजरा खाने से शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। डाइट एक्सपर्ट के अनुसार, बाजरा में मौजूद स्टार्च डायबिटीज पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, जो धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदल जाता है।

गर्भकालीन मधुमेह को कम कर सकता है बाजरा

जेस्टेशनल डायबिटीज यानि गर्भावस्था में मधुमेह होने पर भी महिलाओं को बाजरा का सेवन करना चाहिए। अध्ययन के को-ऑथर प्रो.कौसल्या सुब्रमण्यम कहते हैं कि स्थानीय रूप से बाजरा का न केवल टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कम करता है, बल्कि इसके सेवन से गर्भकालीन मधुमेह को भी कम करने में मदद मिलती है।

​बाजरा खाने से गिर जाता है ब्लड ग्लूकोज लेवल

फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि मधुमेह से जूझ रहे लोग यदि आपन डेली डाइट में बाजरा का सेवन करें, तो ब्लड शुगर लेवल में 12-15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल डायबिटीज से प्री-डायबिटीज की तरफ जाने की संभावना ज्यादा रहती है। प्री-डायबिटिक व्यक्ति के लिए एच1बी का स्तर औसतन 17 फीसदी कम हो जाता है। इस स्थिति में डायबिटीज वाले मरीज प्री डायबिटीज की कैटेगरी में आ जाते हैं

​कम ग्लाइसेमिक वाला खाद्य पदार्थ है बाजरा

अध्ययन में पाया गया कि बाजारा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 52.7 है, जो पिसे हुए चावल और रिफाइंड गेहूं की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम जीआई वाला है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि इसे उबालने, पकाने और भाप लेने के बाद भी चावल , गेहूं और मक्का की तुलना में जीआई बहुत कम होता है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और ICRISAT के वरिष्ठ पोषक वैज्ञानिक डॉ.एस अनीता के अनुसार, बाजरा ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित का बेहतरीन विकल्प है, जिससे मधुमेह का खतरा कम हो जाता है। कहा जा सकता है कि टाइप टू डायबिटीज में खाए जाने वाले कम जीआई वाले खाद्य पदार्थों में बाजरा सबसे अच्छा है।

​ये हैं डायबिटीज में बाजरा के फायदे

बाजरा गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
हृदय रोग का खतरा डायबिटीज से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बाजरा को अपने आहार में शामिल करने से दिल की कई समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है।
फाइबर से भरपूर होने के चलते बाजरा मधुमेह के मरीज के लिए बहुत अच्छा है। दरअसल, धीमे पाचन में मदद करता है। नतीजा होता है कि चीनी धीरे-धीरे ब्लड स्ट्रीम में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।
बाजरा मैग्रीशियम से भरपूर है। इसके सेवन से डायबिटीज के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बाजरे का ग्लाइसेमिक इंडैक्स 54 है, जो इसे एक मीडियम ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड बनाता है।
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अगर हम अपने आहार में बाजरा शामिल कर लें, तो हम न केवल समय रहते मधुमेह को नियंत्रित कर लेंगे, बल्कि खाने में जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी पूरी हो जाएगी।

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